MCD Elections 2022: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नगर निगम (MCD) चुनाव का बिगुल बज चुका है। एमसीडी चुनाव के लिए मतदान (Voting for MCD Elections) 4 दिसंबर को होगा और वोटों की गिनती 7 दिसंबर को होगी। इस बार के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP), आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला (Triangular Contest) होता दिख रहा है। तीनों ही पार्टियों के लिए ये एमसीडी का चुनाव नाक का सवाल बन गया है। हजारों करोड़ रुपये के बजट वाली एमसीडी के पास कई सारी शक्तियां होती हैं। यही वजह है कि सभी पार्टियां काफी रिसर्च करने के बाद उम्मीदवारों को टिकट दे रही हैं।
दिल्ली नगर निगम के आगामी चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी ने 250 वार्डों में से 55 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। AAP ने एक ट्रांसजेंडर को भी टिकट दिया है। आप ने महिलाओं के लिए आरक्षित 125 सीटों के अलावा 13 सामान्य सीटों पर भी महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव के मुख्य मुद्दों में टूटी सड़कें, जलजमाव और कचरा प्रबंधन के मामले शामिल हैं, जिनका सामना राष्ट्रीय राजधानी के लोग सालों से कर रहे हैं।
'महिलाएं जनता की पहली पसंद बनकर उभरी'
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने AAP की ओर से उतारी गई महिला उम्मीदवारों पर पार्टी के एक बयान के हवाले से कहा, 'पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में ये महिलाएं जनता की पहली पसंद बनकर उभरी हैं।' इसमें कहा गया है, "क्षेत्र के लोगों के साथ बेहतर संबंध और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी इन महिलाओं के लिए प्लस पॉइंट थी, जिन्हें सामान्य सीटों पर टिकट मिला था।"
218 वालंटियर्स को मैदान में उतारा
MCD चुनावों के लिए बांटे गए टिकटों में आप ने पार्टी के 218 वालंटियर्स को मैदान में उतारा है। पार्टी का कहना है कि युवा चेहरों को भी प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, 23 और 24 साल के आयु वर्ग के कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया है।
बयान में कहा गया है, "पार्टी ने हमेशा पारिवारिक पृष्ठभूमि के बजाय योग्यता को महत्व दिया है। चुनावों में आम घरों के सदस्यों को महत्व दिया गया है।" AAP के बयान में कहा गया है, 'ऐसे कई उम्मीदवार हैं, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। फिर भी उन्हें टिकट दिया गया है ताकि वे आगे बढ़ सकें, चुनाव जीत सकें और दूसरों को प्रेरित कर सकें।'
सभी पार्टियों ने झोंकी ताकत
राजधानी की सत्ता से भले ही बीजेपी दो दशक से बाहर हो, लेकिन दिल्ली नगर निगम पर पिछले 15 वर्षों से उसका का कब्जा बरकरार है। भगवा पार्टी एक बार फिर से एमसीडी पर अपनी 'बादशाहत' को कायम रखने की कवायद कर रही है। वहीं, दिल्ली की सत्ता पर पिछले 8 साल से काबिज आम आदमी पार्टी ने एमसीडी चुनाव जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जबकि, कांग्रेस दिल्ली में अपने खोए हुए सियासी जनाधार को वापस पाने के लिए एमसीडी चुनाव में पूरी मजबूती से डटी है।