चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक पार्टियां आम लोगों से अधिक से अधिक वायदे करती हैं। इसमें से कुछ वादे मुफ्त में सुविधाएं या अन्य चीजें बांटने को लेकर होती हैं। अब इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) सख्त हो गया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने आज इसे लेकर केंद्र सरकार (Centre) और चुनाव आयोग (Election Commission of India) को नोटिस जारी किया है।
पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें ऐसे राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने और उनके चुनाव चिंह जब्त करने की मांग की गई है, जो मतदाताओं को मुफ्त में सुविधाएं देने के वादे कर रहे हैं।
इस याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए पब्लिक फंड से चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार देने का वादा करने या मुफ्त उपहार बांटना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफ है। यह वोटरों को प्रभावित करने और लुभाने का प्रयास है। इससे चुनाव प्रक्रिया प्रदूषित होती है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे चुनाव मैदान में एक समान अवसर के सिद्धांत प्रभावित होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जनता के पैसे से मुफ्त में चीजें या सुविधाएं देने का चुनावी वादा करने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ एक्शन लेने को लेकर गाइडलाइंस जारी करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के मुताबिक केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को तय करना है कि जो राजनीतिक पार्टियां चुनाव के दौरान जनता के पैसे से यानी पब्लिक फंड से मुफ्त घोषणाएं करती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर गाइडलाइंस तय हों। मुफ्त घोषणाएं करे वाली पार्टियों का रजिस्ट्रेश रद्द किया जा सकता है और उनका चुनावी चिन्ह भी जब्त हो सकता है।
बता दें कि पांच राज्यों के मौजूदा चुनावों में भी आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने आम वोटरों को बिजली और अन्य सुविधाएं मुफ्त में देने का वादा किया है। किसान की कर्जमाफी तो हर चुनाव में बड़ा चुनावी आकर्षण रहा है।