भारतीय जनता पार्टी (BJP) की त्रिपुरा (Tripura) इकाई के प्रमुख सुब्रत चक्रवर्ती (Subrata chakraborty) बृहस्पतिवार को कहा कि अगर पूर्व शाही वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा (प्रद्योत देबबर्मा (Pradyot Debbarma) की टिपरा मोथा (TIPRA Motha) पार्टी अपना समर्थन देती है, तो वह ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ (Greater Tipra Land) के अलावा उनकी सभी मांगें मानने को तैयार हैं। PTI के मुताबिक, चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा, "हम राज्य में अगली सरकार बनाने जा रहे हैं, जैसा कि हम शुरू से कहते आए हैं... दो केंद्रीय नेता फणींद्रनाथ सरमा और संबित पात्रा यहां स्थिति पर नजर रखने के लिए मौजूद हैं। उम्मीद है कि आज और केंद्रीय नेता यहां पहुंचेंगे।"
देबबर्मा की पार्टी का समर्थन करने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ के अलावा BJP उनकी सभी मांगें मांगने को तैयार है।’’ टिपरा मोथा त्रिपुरा की स्वदेशी आबादी के लिए एक अलग राज्य ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग कर रहा है।
निर्वाचन आयोग के आकंड़ों के अनुसार, खबर लिखे जाने तक त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के बाद, आज जारी मतगणना में BJP ने तीन सीटों पर जीत हासिल कर ली है और 29 पर आगे है। कांग्रेस चार सीट पर और उसकी सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) 11 सीटों पर आगे है। टिपरा मोथा 2 सीटें जीत कर 10 सीटों पर आगे है।
टिपरा मोथा नाम से त्रिपुरा के शाही परिवार के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मा ने अपना एक अलग दल बनाया था। भले ही टिपरा मोथा एक नया संगठन है, लेकिन इसका प्राथमिक चुनावी मुद्दा - राज्य की स्वदेशी आबादी के लिए 'ग्रेटर टिपरालैंड' का वादा था।
उसका ये वादा मतदाताओं के बीच काफी चर्चाओं में भी रहा। जैसा कि समझा जा रहा था, पहली चुनावी मैदान में उतरने वाले इस संगठन ने प्रतिद्वंद्वियों के वोट शेयरों में काफी सेंधमारी भी की है।
2018 में IPFT और BJP उसी वादे के दम पर विजयी हुए थे, लेकिन आदिवासी पार्टी देने में विफल रही और इसने देब बर्मा के लिए दरवाजा खोल दिया।
शाही ने 2019 में टिपरा मोथा लॉन्च किया और 2021 में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद चुनाव जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
TTAADC में राज्य का लगभग दो-तिहाई हिस्सा शामिल है और इसकी 90 प्रतिशत आबादी आदिवासी है। टिपरा ने 18 सीटें जीतीं, BJP ने 10 और IPFT के खाते में एक भी सीट नहीं गई थी।