उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों को 'बचकाना' बता कर खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीएम योगी ने टैबलेट और स्मार्टफोन बांटने में देरी की, क्योंकि वह खुद गैजेट नहीं चला सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव शायद यह नहीं जानते कि मैं अपने कार्यालय और आवास में लगे ई-डैशबोर्ड के जरिए सरकारी योजनाओं के कामकाज की निगरानी कर रहा हूं।
उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक हेलीकॉप्टर में दिए एक इंटरव्यू में PTI को बताया कि सरकार ने पिछली बार भी एक ई-बजट पेश किया था और इस बार भी।
वह अखिलेश के उस बयान का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था, "चूंकि 'बाबा मुख्यमंत्री' लैपटॉप और टैबलेट को चलाना नहीं जानते हैं, इसलिए उन्होंने राज्य में भाजपा के 2017 के चुनावी वादों के हिस्से के रूप में वितरण में देरी की।"
इसे बचकाना बयान बताते हुए, सीएम योगी ने कहा कि यादव जीवन भर एक 'बबुआ' (बच्चा) ही रहेंगे और कहा कि "ऐसी टिप्पणियां संस्कार और संस्कृति से रहित हैं।"
उत्तर प्रदेश सुशासन के हिस्से के रूप में व्यापक पैमाने पर सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहा है। सरकार ने पिछली सरकारों के दौरान "भ्रष्टाचार" को खत्म करने के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया को अपनाया है, क्योंकि पहले बिचौलिए विकास परियोजनाओं के बड़े हिस्से को "निगल" जाया करते थे।
आदित्यनाथ ने कहा कि ऑनलाइन निगरानी ने सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर बनाने के साथ-साथ कोविड मामलों की प्रभावी निगरानी में मदद की। उन्होंने कहा कि ई-प्लेटफॉर्म के व्यापक इस्तेमाल के कारण उत्तर प्रदेश पीडीएस प्रणाली देश में सबसे ज्यादा पारदर्शी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 2017 के चुनावी वादे के तहत युवाओं को एक करोड़ टैबलेट बांटती रहेगी। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होने पर टैबलेट उपलब्ध कराने पर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा, "उन्हें रोने दो। हम युवाओं में एक करोड़ टैबलेट बांटेंगे और 10 मार्च के बाद यह आंकड़ा दोगुना होकर दो करोड़ हो जाएगा।"