IBA Women's World Boxing Championship: भारत की स्टार मुक्केबाज निकहत जरीन (Nikhat Zareen) ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित वूमेन्स वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है। निकहत जरीन ने IBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप 2023 में गोल्ड मेडल जीतने के लिए 50 किलोग्राम लाइट फ्लाईवेट वर्ग के फाइनल में वियतनाम की दो बार की एशियाई चैंपियन गुयेन थी टैम (Nguyen Thi Tam) को हराया है। निकहत ने गुयेन थी टैम को 5-0 से हराया। यह उनका लगातार दूसरा वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड मेडल है। जरीन ने भारत को तीसरा गोल्ड मेडल दिलाया है।
26 साल की निकहत ने पिछले साल भी वूमेन्स वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इससे पहले भारतीय दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने इस चैम्पियनशिप में रिकॉर्ड 6 बार गोल्ड मेडल (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018) जीत चुकी हैं। वहीं, सरिता देवी (2006), जेनी आरएल (2006), लेखा केसी (2006), नीतू घनघस (2023) और स्वीटी बूरा (2023) भी इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय बॉक्सर हैं।
निकहत जरीन ने सेमीफाइनल मैच में कोलंबिया की इनग्रिड वैलेंसिया को मात देते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। वैलेंसिया ने ही टोक्यो ओलंपिक में एमसी मैरी कॉम की चुनौती को तोड़कर उनका सपना चकनाचूर कर दिया था। निकहत से पहले ही गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने आशा अनुसार प्रदर्शन कर देश को सोना दिलाया।
फाइनल मैच में निकहत ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। पहले राउंड में उन्होंने बढ़त बना ली थी। इसके बाद दूसरे राउंड में भी उन्होंने अपनी बढ़त जारी रखी और तीसरे राउंड में वियतनाम की मुक्केबाज को शानदार पंच जड़ा। इसके बाद रेफरी ने मैच रोककर वियतनाम की मुक्केबाज का हाल-चाल जाना। यहीं से निकहत की जीत तय हो गई थी।
महज 13 साल की उम्र से निकहत ने बॉक्सिंग शुरू कर दिया। छह महीने के भीतर उन्होंने साल 2010 में करीमनगर में स्टेट चैम्पियनशिप का गोल्ड मेडल जीत लिया था। इसके तीन महीने के भीतर उन्हें इरोड (तमिलनाडु) में सब-जूनियर चैम्पियनशिप में 'सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज' चुना गया। साल 2011 में वर्ल्ड जूनियर और युवा चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर निकहत ने अपने सपनों को हकीकत में बदलना शुरू कर दिया।