पूरे होंगे खिलाड़ियों के सपने! टेबल टेनिस खिलाड़ी अमन ढल्ल ने लॉफबोरो यूनिवर्सिटी में पिता की याद में शुरू की स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप

GBP 12,500 यानी करीब साढ़े 13 लाख रुपए की ये स्कॉलरशिप पांच साल के लिए है। इसके जरिए लॉफबोरो में ऐसे भारतीय छात्रों को आर्थिक मदद दी जाएगी, जो इंटरनेशनल लेवल पर किसी कंपटीशन या क्रिकेट से अलग किसी खेल की तैयारी कर रहे हैं

अपडेटेड Aug 16, 2024 पर 5:33 PM
टेबल टेनिस खिलाड़ी अमन ढल्ल ने लॉफबोरो यूनिवर्सिटी में पिता की याद में शुरू की स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप

2024 के पेरिस ओलिंपिक में भारत के नीरज चोपड़ा, मनु भाकर और पीआर श्रीजेश जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया। ऐसे में भारतीय उद्यमी, रणनीतिक निवेशक और टेबल टेनिस खिलाड़ी अमन ढल्ल ने अपने दिवंगत पिता वीरेंद्र कुमार ढल्ल की याद में विश्व प्रसिद्ध खेल संस्थान लॉफबोरो यूनिवर्सिटी में पांच साल की स्कॉलरशिप की घोषणा की। GBP 12,500 यानी करीब साढ़े 13 लाख रुपए की ये स्कॉलरशिप पांच साल के लिए है। इसके जरिए लॉफबोरो में ऐसे भारतीय छात्रों को आर्थिक मदद दी जाएगी, जो इंटरनेशनल लेवल पर किसी कंपटीशन या क्रिकेट से अलग किसी खेल की तैयारी कर रहे हैं।

वीरेंद्र कुमार ढल्ल स्कॉलरशिप फॉर स्पोर्टिंग एक्सीलेंस उन युवा भारतीय एथलीटों को सशक्त बनाने के लिए डिजाइन की गई है, जो स्पोर्टिंग एक्सीलेंस की खोज में फाइनेंशियल और दूसरी मुश्किलों का सामना करते हैं।

स्कॉलरशिप में क्या-क्या बेनिफिट?


लॉफबोरो यूनिवर्सिटी में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट या PhD लेवल के छात्र इस स्कॉलरशिप के योग्य होंगे, फिर चाहे वो फुल टाइम या पार्टी टाइम स्टडी कर रहे हों।

सालाना स्कॉलरशिप एथलीट को ट्रोनिंग और बड़े-बड़े स्पोर्ट इवेंट में भाग लेने के लिए जो जरूरतें हैं उन्हें पूरा करेगी, जिसके तहत उन्हें £2,500 करीब दो लाख 70,000 रुपए तक दिए जाएंगे।

इसमें खेलों के लिए ट्रेनिंग, डिवाइस, कोचिंग, न्यूट्रिशनल एडवाइस, जिम मेंबरशिप और दूसरे जरूरी संसाधनों के लिए यात्रा से जुड़े खर्च शामिल हैं।

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नीरज चोपड़ा का ट्रेनिंग ग्राउंड लॉफबोरो यूनिवर्सिटी

लॉफबोरो यूनिवर्सिटी भारत के युवा खेल आइकन, नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) के लिए एक ट्रेनिंग ग्राउंड रहा है, और लॉर्ड सेबेस्टियन कोए, एडम पीटी ओबीई और पाउला रैडक्लिफ एमबीई जैसे कई वर्तमान और पूर्व अंतरराष्ट्रीय खेल आइकन का घर रहा है।

2010-11 में लॉफबोरो यूनिवर्सिटी से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में MSc की पढ़ाई पूरी करने वाले अमन ढल्ल ने अपने पिता की याद में ये स्कॉलरशिप शूरू है की है, जिनका सपना था अपने बेटे को भारत के लिए खेलते देखना।

अमन ढल्ल का अनुभव और उनका सपना

अमन को अपने खेल करियर की शुरुआत में कई बड़ी वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे प्रोफेशनल स्पोर्ट्स में आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता में कई रुकावटें पैदा हुईं। अपने अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए, अमन इस स्कॉलरशिप के जरिए भारतीय एथलीटों की अगली पीढ़ी का समर्थन करने के लिए समर्पित हैं।

इस पहल पर विचार करते हुए, अमन ढल्ल ने कहा, "यह स्कॉलरशिप मेरे पिता को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने हमेशा भारत का प्रतिनिधित्व करने की मेरी क्षमता पर विश्वास किया। ये समर्थन देकर मैं प्रतिभाशाली भारतीय एथलीटों की उन बाधाओं को दूर करने में मदद करने की उम्मीद करता हूं जिनका मैंने एक बार सामना किया था, ताकि वे अपने सपने पूरे कर सकें।"

उन्होंने आगे कहा, "हमें मालूम है कि एथलीट को अक्सर हाई लेवल ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग सोर्स से पैसे की जरूरत होती है, इसलिए अगर कोई पहले से ही किसी और स्कॉलरशिप का फायदा भी उठा रहा है, तो भी ये स्कॉलरशिप उसे मिल सकती है।"

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