केंद्र सरकार राज्यों को नहीं देगी रेमडेसिविर इंजेक्शन, राज्यों को खुद कंपनी से होगा खरीदना - the central government will not give remedesivir injection to the states the states will buy from the company itself | Moneycontrol Hindi

केंद्र सरकार राज्यों को नहीं देगी रेमडेसिविर इंजेक्शन, राज्यों को खुद कंपनी से होगा खरीदना

राज्य सरकारों को अब केंद्र से रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं की जायेगी

MoneyControl News | अपडेटेड May 30, 2021 पर 10:50 AM

केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि अब राज्य की सरकारों को खुद अपनी जरूरत के हिसाब से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदना होगा। शनिवार को रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ऐलान किया कि सरकार ने राज्यों को रेमडेसिविर के केंद्रीय आवंटन को बंद करने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग एजेंसी और सीडीएससीओ को देश में रेमडेसिविर की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक सरकार ने बताया कि अब देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के प्लांट 20 से बढ़ कर 60 हो गए हैं और अब डिमांड से ज्यादा सप्लाई है। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया पर घोषणा की है मुझे आप सभी को ये बताते हुए खुशी और संतुष्टि हो रही है कि रेमडेसिविर का उत्पादन 10 गुना बढ़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में 11 अप्रैल 2021 को हर रोज 33,000 इंजेक्शन की वायल बन रही थी जबकि अब हर रोज ये आंकड़ा बढ़ कर साढ़े 3 लाख पहुंच गया है।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पूरे देश में हर तरफ रेमडिसिविर इंजेक्शन (Remdesivir) की भारी किल्लत देखी गई थी। कई राज्यों में इसकी जमकर ब्लैक मार्केटिंग हुई। इसके अलावा कई शहरों में पुलिस ने नकली रेमडिसिविर इंजेक्शन भी जब्त किए। कम उत्पादन होने के चलते ये इंजेक्शन केंद्र सरकार की तरफ से राज्य सरकारों को दिये जा रहे थे। हालांकि अब सरकार ने घोषणा की है राज्य सरकारें खुद अपनी जरूरत के हिसाब से ये इंजेक्शन सीधे कंपनियों से खरीद सकती हैं।

गौरतलब है कि रेमडेसिविर का पेटेंट अमेरिका की कंपनी गिलिएड साइंसेस के पास है। उसने चार भारतीय कंपनियों सिप्ला, हेटेरो लैब्स, जुबलिएंट लाइफसाइंसेस और मिलान से इसे बनाने का एग्रीमेंट किया है। ये चारों कंपनियां बड़े पैमाने पर रेमडेसिविर बनाती हैं और दुनिया के तकरीबन 126 देशों को एक्सपोर्ट करती हैं। इस दवा की कीमत भारतीय बाजार में करीब 4800 रुपये है लेकिन ब्लैक मार्केटिंग की चलते ये बहुत अधिक या मनमानी कीमत पर बेची जा रही थी। 

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First Published: May 29, 2021 2:55 PM

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