रेलवे को भारत की लाइफ लाइन कहा जाता है। हर दिन लाखों की संख्या में लोग ट्रेन में सफर करते हैँ। ट्रेन का सफर बेहद सुविधाजनक और सस्ता माना जाता है। देश में आज भी एक बड़ा तबका लंबे सफर के लिए ट्रेन को ही पसंद करता है। रेलवे भी अपने यात्रियों को कई तरह की नई सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश में जुटा रहता है। इसबीच ट्रेनों की साफ-सफाई के लिए रेलवे ने खास तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसके लिए ऑटोमैटिक कोच वॉशिंग प्लांट लगाए गए हैं। इसमें पानी कम खर्च होता है। कुछ मिनट में ट्रेन चमक जाती है।
इस तकनीक में इंसानों की जरूरत नहीं पड़ती है। मशीन से ही ट्रेन की सफाई होती है। सोशल मीडिया में इसका वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें आप देखेंगे कि ट्रेनों को कैसे धोया जाता है। अपने अंतिम स्टेशन पर पहुंचने के बाद ड्राइवर ट्रेन को रेलवे यार्ड में लेकर जाता है। यहां अब आधुनिक तरीके से इनकी सफाई होती है।
8 मिनट में 20 कोच की ट्रेन चमक जाती है
वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि लाइन के दोनों तरफ बड़े-बड़े ब्रश, प्रेशर के साथ पानी निकलने के लिए पंप लगे होते हैं। पहले ब्रश ट्रेन पर जमी धूल को निकालता है। फिर प्रेशर के साथ पानी डाला जाता है। इसी तरह से सिर्फ 7 से 8 मिनट में चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों की सफाई हो जाती है। ट्रेन बहुत ही धीमी स्पीड में चल रही है। लेकिन प्लांट में इसकी ऑटोमैटिक सफाई होती रहती है। इसमें किसी इंसान की जरूरत नहीं पड़ती है। 24 डिब्बों की ट्रेन को यह प्लांट लगभग 15 मिनट में साफ कर देता है। इतना ही नहीं, टॉयलेट के नीचले हिस्से को भी साफ कर उसे संक्रमण मुक्त बनाता है। इस वीडियो को X के हैंडल @HowThingsWork_ पर शेयर किया गया है।
ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट से पानी की बचत
ऑटोमैटिक कोच वॉशिंग प्लांट में आम धुलाई के मुकाबले करीब 20 फीसदी ही पानी का इस्तेमाल करता है। वहीं इस 20 फीसदी पानी से जब ट्रेन की धुलाई होती है तो इसका करीब 80 फीसदी पानी फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए प्लांट में पानी को साफ करने की भी व्यवस्था है। यह प्लांट में ट्रेनों की सफाई में समय और पानी दोनों की बचत होती है। ट्रेन के गुजरने पर प्लांट पहले एक कैमिकल का छिड़काव करता है। इसके बाद बड़े-बड़े ब्रश और पानी के जरिए ट्रेन के कोच को साफ करता है। इस प्लांट में मैन्यूअल कुछ भी नहीं है। बल्कि ठंडा और गर्म पानी हाईप्रेशर से ट्रेन के ऊपर डालता है।