IPO Investment Strategy: बजाज फिनसर्व एएमसी के चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) निमेष चंदन का कहना है कि किसी कंपनी के आईपीओ में निवेश को लेकर काफी सतर्क रहना चाहिए और सेलेक्टिव होना चाहिए। उनका कहना है कि मार्केट में हाई क्वालिटी के आईपीओ आ रहे हों लेकिन अपनी रणनीति छोड़नी नहीं चाहिए। चंदन के मुताबिक लेंसकार्ट सॉल्यूशंस (Lenskart Solutions) और पाइन लैब्स (Pine Labs) जैसे नए लिस्टेड शेयर अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड तो कर रहे हैं, लेकिन उनका फंड हाउस वैल्यूशन को लेकर काफी सतर्क रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि काफी सोच-विचार कर ही उनके फंड हाउस ने ग्रो (Groww) की बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (Billionbrains Garage Ventures) और फार्मा कंपनी रुबिकॉन रिसर्च (Rubicon Research) के आईपीओ में हिस्सा लिया था।
IPO मतलब ‘It’s Probably Overpriced’ यानी शायद महंगा है आईपीओ
चंदन ने कहा कि उनकी सेलेक्टेटिव स्ट्रैटेजी बेंजामिन ग्रैहम के निवेश सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बेंजामिन ग्रैहम की किताब में एक लाइन है कि बुल मार्केट में आईपीओ का मतलब होता है ‘It’s Probably Overpriced’ यानी शायद आईपीओ काफी महंगा है और वह इसी सिद्धांत पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सेकेंडरी मार्केट में बेहतर वैल्यू मिलती है, तो वह आईपीओ के पीछे नहीं भागते। उन्होंने इसे अपने फंड हाउस की आधिकारिक नीति बताया।
आईपीओ मार्केट में यह हो तो चिंता की बात
प्राइसिंग को लेकर सतर्कता के रुझानों के बीच उन्होंने मजबूत कंपनियों की लिस्टिंग के पॉजिटिव रुझान को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां आईपीओ के लिए आ रही हैं, वे अभी भी अच्छी गुणवत्ता की हैं, वे या तो डिजिटल या तकनीकी प्लेटफॉर्म के साथ आ रही हैं या उनके कारोबार की आने वाले समय में काफी मांग होने वाली है। चंदन इसे बाजार के लिए पॉजिटिव मान रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने मौजूदा माहौल और स्टॉक मार्केट की रिकॉर्ड हाई के बीच कहा कि असली चिंता तब होती है, जब संदिग्ध कारोबारी मॉडल या बिना मार्केट लीडरशिप वाली कंपनी को धांसू सब्सक्रिप्शन मिलने लगे।
कब तक सही होती है स्थिति?
चंदन का कहना है कि प्री-आईपीओ निवेशकों की लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद मार्केट में शेयर सप्लाई बढ़ती है। इससे शॉर्ट-टर्म में शेयरों की कीमतों में गिरावट आ सकती है लेकिन लॉन्ग-टर्म में निवेशकों के लिए यह मौका भी बनाता है। बता दें कि लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद प्री-आईपीओ निवेशकों के पास मुनाफा निकालने का विकल्प मिल जाता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह ऐसा करें। चंदन का कहना है कि लॉन्ग-टर्म में हर कंपनी को उसके हिसाब से शेयरहोल्डक मिलते हैं। उनका मानना है कि एक साल में वास्तविक शेयरहोल्डर दिखने लगते हैं।
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