OYO IPO : हॉस्पिटैलिटी चेन ओयो के आईपीओ में अभी तीन महीने की और देरी हो सकती है। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने रितेश अग्रवाल (Ritesh Agarwal) के स्टार्टअप से अपने ड्राफ्ट आईपीओ पेपर्स को अपडेट करने के लिए कहा है। इकोनॉमिक टाइम्स से मिली रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। सेबी ने ओरेवल स्टेस (Oyo) से कंपनी के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में रिस्क फैक्टर्स, अपने प्रमुख प्रदर्शन के इंडिकेटर्स (KPI), लंबित मुकदमे और कंपनी की वैल्यूएशन का आधार शामिल करने का अनुरोध किया है। अभी तक आईपीओ के 2023 की पहली छमाही में लॉन्च होने की उम्मीद की जा रही थी।
हालांकि, मनीकंट्रोल स्वतंत्र रूप से इस रिपोर्ट को सत्यापित नहीं कर सकी है।
दो-तीन महीने की हो सकती है देरी
हालांकि, कंपनी की योजनाओं के बारे में जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि उपयुक्त जानकारी अपडेट करने का मौका मिलना एक “स्वागत योग्य” कदम है। उन्होंने कहा, नई जानकारी के आधार पर निवेशकों से पैसे लगाने की उम्मीद करना ही समझदारी भरा होगा। साथ ही, हमसे उचित प्री-आईपीओ स्टेज में नए डिस्क्लोजर देने के लिए कहा गया है। यह अब काम करने का सबसे समझदारी भरा तरीका है। हालांकि, इससे IPO में दो-तीन महीने की देरी हो सकती है, लेकिन हम इस प्रोसेस में पूरे वित्त वर्ष का एबिटडा प्रॉफिट दिखा सकेंगे।
आईपीओ के आवेदन के बाद प्रदर्शन में हुआ है सुधार
ओयो ने हाल में डीआरएचपी के पूरक के जरिये वित्त वर्ष 23 की पहली छमाही के फाइनेंशियल डेटा सेबी को उपलब्ध कराया था। इसमें रेगुलेटर को बताया गया कि उसके सितंबर, 2021 के आईपीओ के आवेदन के बाद से कारोबारी प्रदर्शन में हुए खासे सुधार के बारे में संभावित इनवेस्टर्स को जारी जरूरी था। अब Sebi ने कंपनी से अतिरिक्त ठोस जानकारी देने का अनुरोध किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक सूत्र ने कहा कि सेबी ने ओयो को लिखा कि मौजूदा DRHP के डिस्क्लोजर्स में अहम अपडेट और डिस्क्लोजर्स को शामिल नहीं किया गया है। इसलिए, डीआरएचपी में रिस्क फैक्टर्, ऑफर प्राइस का आधार, लंबित मुकदमों का उल्लेख करना जरूरी है।