PhonePe IPO को मिली SEBI की मंजूरी, ₹12000 करोड़ जुटाने का प्लान; जानिए वैल्यूएशन समेत पूरी डिटेल

PhonePe IPO: दिग्गज फिनटेक फोनपे के आईपीओ को SEBI की मंजूरी मिल गई है। कंपनी 12,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। जानिए UPI दबदबे, IPO स्ट्रक्चर, शेयरहोल्डर्स और फिनटेक लिस्टिंग ट्रेंड्स की पूरी डिटेल।

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 3:16 PM
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UPI प्लेटफॉर्म पर PhonePe की मार्केट हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है।

PhonePe IPO: UPI पेमेंट्स मार्केट की लीडर कंपनी PhonePe को अपने IPO के लिए 20 जनवरी को मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। यह जानकारी मामले से वाकिफ दो सूत्रों ने दी है। इस IPO में PhonePe का वैल्यूएशन करीब 15 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है।

कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 12,000 करोड़ रुपये (लगभग 1.35 अरब डॉलर) जुटाना चाहती है। यह पूरा इश्यू OFS यानी Offer For Sale के जरिए आ सकता है, यानी इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं होगा, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

जल्द आएगा अपडेटेड DRHP


PhonePe अगले कुछ दिनों में अपना अपडेटेड DRHP दाखिल कर सकती है, जो एक पब्लिक डॉक्युमेंट होता है। इससे पहले सितंबर के आखिर में कंपनी ने IPO के लिए कंफिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा किए थे। PhonePe की पैरेंट कंपनी ग्लोबल रिटेल दिग्गज Walmart के स्वामित्व में है।

न्यू इकोनमी का दूसरा सबसे बड़ा IPO

बेंगलुरु बेस्ड PhonePe की लिस्टिंग, भारत में न्यू इकॉनमी सेक्टर की दूसरी सबसे बड़ी लिस्टिंग बनने जा रही है। इससे पहले 2021 में Paytm का IPO आया था, जो उस वक्त सबसे बड़ा न्यू इकोनमी IPO था।

Paytm का IPO करीब 20 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर आया था और इसका इश्यू साइज करीब 18,000 करोड़ रुपये था। PhonePe का IPO साइज इससे थोड़ा छोटा होगा, लेकिन सेक्टर के लिहाज से इसका महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है।

फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy ने नवंबर 2024 में IPO के जरिए करीब 11,300 करोड़ रुपये जुटाए थे। डॉलर के हिसाब से इसका इश्यू साइज भी करीब 1.35 अरब डॉलर था, जो PhonePe के प्रस्तावित IPO के आसपास ही है।

UPI में PhonePe का दबदबा

UPI प्लेटफॉर्म पर PhonePe की मार्केट हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। इसका सबसे नजदीकी मुकाबला Google Pay से है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत है। देश में होने वाले 85 प्रतिशत से ज्यादा डिजिटल पेमेंट्स UPI के जरिए ही प्रोसेस होते हैं।

भारी निवेश और बड़े कॉर्पोरेट सपोर्ट के साथ नए प्लेयर्स आने के बावजूद PhonePe की मजबूत पकड़ बनी हुई है। यही वजह है कि निवेशक इसके IPO को लेकर काफी उत्साहित हैं।

PhonePe हर महीने करीब 10 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है, जिनकी कुल वैल्यू 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। प्लेटफॉर्म की लगातार ग्रोथ, नए यूज केस और इनोवेशन ने UPI को देश का सबसे मजबूत डिजिटल पेमेंट सिस्टम बना दिया है।

पेमेंट्स के अलावा भी कई बिजनेस

PhonePe सिर्फ पेमेंट्स तक सीमित नहीं है। कंपनी के पास शेयर मार्केट ट्रेडिंग ऐप share.market, लेंडिंग प्लेटफॉर्म और इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने जैसे कई दूसरे वर्टिकल्स भी हैं।

इसके बावजूद, कंपनी की ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार आज भी पेमेंट्स बिजनेस ही है। कुल Revenue का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इसी से आता है।

IPO में कौन बेच रहा है हिस्सेदारी

इस IPO में Walmart, Tiger Global और Microsoft अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। इन तीनों की मिलाकर करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का डाइल्यूशन होने की उम्मीद है।

इस IPO के लिए Kotak Mahindra Capital, Citi, Morgan Stanley और JP Morgan जैसे बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक एडवाइजर के तौर पर जुड़े हैं। इन बैंकों का टारगेट PhonePe को करीब 15 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर लिस्ट कराना है।

फिनटेक IPOs का ट्रैक रिकॉर्ड

Paytm का IPO पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ था, लेकिन लिस्टिंग के बाद कंपनी के स्टॉक्स में भारी गिरावट आई। कई एनालिस्ट्स के डाउनग्रेड के बाद Paytm का वैल्यूएशन घटकर करीब 9.5 अरब डॉलर रह गया है।

वहीं, वेल्थ-टेक प्लेटफॉर्म Groww पिछले साल के आखिर में करीब 7.5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर लिस्ट हुआ था और अब यह करीब 10.5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है।

इंश्योरेंस मार्केटप्लेस PB Fintech का IPO भी काफी सफल रहा। कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन करीब 9 अरब डॉलर है, जबकि लिस्टिंग के वक्त यह करीब 6 अरब डॉलर था।

Pine Labs का IPO 11 नवंबर को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए बंद हुआ था। यह अपने तीसरे और आखिरी दिन करीब 2.5 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस IPO का कुल इश्यू साइज करीब 3,900 करोड़ रुपये रहा।

इसमें 2,080 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 8.23 करोड़ इक्विटी शेयरों का OFS शामिल था। इस OFS में Peak XV Partners, Macritchie Investments, Madison India, Mastercard और PayPal जैसे बड़े निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेची।

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