बजाज हाउसिंग फाइनेंस का आईपीओ 9 सितंबर को खुलने के कुछ ही घंटों में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। क्लोज होने तक इस इश्यू के कई गुना सब्सक्राइब हो जाने की उम्मीद है। किसी सब्सिडियरी की बंपर लिस्टिंग उसकी पेरेंट कंपनी के लिए वैल्यूएशन के मामले में मार्केट में बड़ी जीत के समान होती है। यह बात बजाज फाइनेंस पर भी लागू होती है। बीते एक महीने में बजाज फाइनेंस का शेयर प्राइस 10 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसमें बजाज हाउसिंग के आईपीओ से जुड़ी खबरों का भी हाथ है। इसके अलावा बजाज फाइनेंस का पहली तिमाही में प्रदर्शन भी शानदार रहा है।
बजाज हाउसिंग में हिस्सेदारी बेचने से 3000 करोड़ मिलेंगे
Bajaj Finance को अपनी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में हिस्सेदारी बेचने से 3,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस इश्यू में कंपनी 3,560 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस आईपीओ से बजाज फाइनेंस को ज्यादा मदद मिलने वाली नहीं है। जहां तक वैल्यूएशन की बात है तो नए शेयरों के जारी होने से सब्सिडियरी में हिस्सेदारी घटने की वजह से बजाज फाइनेंस पर होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लागू होगा।
एसेट क्वालिटी पर कुछ दबाव
अपनी हिस्सेदारी के कुछ शेयर पब्लिक को जारी करने का मतलब है कि Bajaj Finance के मौजूदा शेयरधारकों को बजाज हाउसिंग के प्रॉफिट में कम हिस्सा मिलेगा। बजाज हाउसिंग में हिस्सेदारी बेचने से बजाज फाइनेंस को 3000 करोड़ रुपये मिलेगा। लेकिन, बजाज फाइनेंस को अपनी एसेट क्वालिटी और मार्जिन पर थोड़ा दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादा रिस्क वाले लोन की कुछ कैटेगरी में प्रॉब्लम बढ़ी है। इसके दूसरी तिमाही में भी जारी रहने के आसार हैं।
एसेट क्वालिटी पर कंपनी का फोकस रहेगा
बजाज फाइनेंस के मैनेजमेंट ने कहा कहा है कि वह लोन पोर्टफोलियो पर करीबी नजर बनाए रखेगा। साथ ही प्रॉब्लम को देखते हुए कुछ सेगमेंट को कर्ज देने में कमी करेगा। इसका मतलब है कि एसेट क्वालिटी में गिरावट को रोकने के लिए बजाज फाइनेंस ग्रोथ के मौकों का इस्तेमाल नहीं करेगा। उदाहरण के लिए कंपनी ने नए लोन के अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को सख्त बनाया है। इसका असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ेगा। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के एनालिस्ट्स ने इस बारे में अपनी रिपोर्ट में बताया है। उसने कहा है कि बजाज फाइनेंस ने नए लोन पर स्टैंडर्ड्स को सख्त बनाया है। इससे लोन ग्रोथ 31 फीसदी से घटकर 25-26 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद है।
दूसरी तिमाही में एसेट क्वालिटी पर दबाव बने रहने की उम्मीद
एनालिस्ट्स का कहना है कि इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में एसेट क्वालिटी पर दबाव में कमी देखने को मिलेगी। इसका मतलब है कि यह तिमाही (जुलाई-सितंबर) कंपनी के लिए मुश्किल बनी रहेगी। बजाज हाउसिंग में हिस्सेदारी बेचने से बजाज फाइनेंस की लोन बुक के डायवर्सिफिकेशन में कमी आएगी क्योंकि हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी होगी, जिसमें बजाज फाइनेंस की कम हिस्सेदारी होगी। इससे बजाज फाइनेंस को पोर्टफोलियो में अनसेक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी बढ़कर 52 फीसदी हो जाएगी।
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कंपनी फेस्टिव सीजन में मौके का फायदा उठाएगी
इसके बावजूद बजाज फाइनेंस की एसेट क्वालिटी इंडस्ट्री में सबसे अच्छी होगी। निवेशक इस साल की दूसरी छमाही में स्थितियां बेहतर होने की उम्मीद से राहत महसूस कर सकते हैं। यह बात ध्यान में रखने वाली है कि बजाज फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को मालामाल किया है। बजाज हाउसिंग के आईपीओ की खबरों से बजाज फाइनेंस के शेयरों में तेजी दिखी है। इसकी वजह यह है कि बजाज हाउसिंग में हिस्सेदारी बेचने से बजाज फाइनेंस को कैश मिलेगा, जिसका इस्तेमाल कंपनी ग्राहकों को कर्ज देने के लिए करेगी। बजाज फाइनेंस फेस्टिवल सीजन का फायदा उठाएगी।