शेयर बाजारों पर दबाव घटने का नाम नहीं ले रहा है। क्रूड की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी में बॉन्ड यील्ड में उछाल और आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार के सेंटिमेंट को खराब किया है। इनवेस्टर्स बाजार से दूरी बना रहे हैं। उन्हें बाजार में हालात बदलते नहीं दिख रहे। सवाल है कि आगे बाजार की चाल कैसी रहने वाली है। इस सवाल का जवाब बंधन एएमसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक कुमार ने दिया। उन्होंने शेयर बाजार को लेकर कई अहम बातें बताईं।
बाजार एक साल तक सीमित दायरे में रह सकते हैं
कुमार ने कहा कि शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एक साल तक सीमित दायरे में बने रह सकते हैं। हालांकि, शेयरों की वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है, जिससे उन इनवेस्टर्स के लिए खरीदारी का अच्छा मौका बना है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। कई क्वालिटी स्टॉक्स की कीमत पीक से काफी नीचे आ चुकी है।
यह शेयर बाजार में एंट्री के लिए शानदार मौका
उन्होंने कहा कि अगर कोई मार्केट में एंट्री करना चाहता है तो यह उसके लिए खराब समय नहीं है। बाजार पर दबाव बढ़ाने में तीन चीजों का हाथ है। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती शामिल हैं। पिछले कुछ हफ्तों में क्रूड ने मार्केट पर काफी दबाव बनाया है। यह काफी समय से 100 डॉलर के पार टिका हुआ है।
इंश्योरेंस कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं
उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी ने लार्जकैप और मिडकैप बैंकों में निवेश बढ़ाया है। हालांकि, हमने इंश्योरेंस कंपनियों से दूरी बनाई है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में कुछ समय तक इस सेक्टर से दूर रहना ठीक रहेगा। कैपिटल मार्केट्स की थीम अट्रैक्टिव लगती है। मार्केट में लोगों का पार्टिसिपेशन बढ़ने से इस सेक्टर को फायदा होगा।
आईपीओ में बोली लगाने में सावधानी बरतने की सलाह
कुमार ने आईपीओ मार्केट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बंधन एएमसी आईपीओ में बोली लगाने में काफी सावधानी बरतती है। फंड हाउस का अपना एनालिसिस सिस्टम है। हर आईपीओ के एनालिसिस के बाद ही एएमसी बोली लगाने का फैसला लेती है।
यूपीआई एमडीआर चार्ज का असर कंपनियों पर दिखेगा
उन्होंने कहा कि बंधन बैंक का निवेश कुछ ऐसी कंपनियों में है, जो यूपीआई से जुड़ी हैं। सरकार ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई के पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला किया है। यह देखना होगा कि इन कंपनियों पर इसका असर किस तरह से पड़ता है।