IIFL Finance पर RBI के गोल्ड लोन प्रतिबंध के बाद जेफरीज ने घटाई रेटिंग, जानें टारगेट प्राइस

IIFL Finance Share Price: जेफरीज ने IIFL Finance पर रेटिंग को 'खरीद' से घटाकर 'होल्ड' कर दिया है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस को 765 रुपये से घटाकर 435 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। एनालिस्ट्स को लगता है कि 5 मार्च को 20 प्रतिशत लोअर सर्किट लगने के बाद स्टॉक में 9 प्रतिशत की गिरावट आएगी

अपडेटेड Mar 06, 2024 पर 10:01 AM
IIFL Finance पर जेफरीज ने कहा कि हम मानते हैं कि प्रतिबंध 9 महीने तक रहेगा। इसलिए हमें उम्मीद है कि एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 1 प्रतिशत की गिरावट आएगी
     
     
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    IIFL Finance Share Price: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईआईएफएल फाइनेंस (IIFL Finance) पर रेटिंग को 'खरीद' से घटाकर 'होल्ड' कर दिया है। ब्रोकरेज ने लक्ष्य मूल्य 765 रुपये से घटाकर 435 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। इसका मतलब है कि ये है कि एनालिस्ट्स को लगता है कि 5 मार्च को 20 प्रतिशत लोअर सर्किट लगने के बाद स्टॉक में 9 प्रतिशत की गिरावट आएगी। भारतीय रिजर्व बैंक (The Reserve Bank of India (RBI) ने आईआईएफएल फाइनेंस को गोल्ड लोन स्वीकृत करने या डिस्बर्स करने पर रोक लगाई है। यह निर्णय 31 मार्च, 2023 को आरबीआई द्वारा कंपनी की जांच के बाद लिया गया। इस जांच में कुछ मामलो में कंपनी के कामकाज में विसंगतियों का पता चला।

    "कंपनी के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में कुछ चिंताएं देखी गईं। इनमें लोन मंजूरी के समय सोने की शुद्धता और शुद्ध वजन की जांच और प्रमाणित करने में गंभीर अनियमितता देखी गई। लोन देने की रकम और सोने की कीमत में विसंगितियां मिली। सोने की शुद्धता और वजन में भी दिक्कतें नजर आई हैं। कंपनी की फाइलिंग में आरबीआई के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है, ''नकदी में दी गई लोन राशि वैधानिक सीमा से कहीं अधिक है।''

    जेफरीज के विश्लेषकों ने कहा कि गोल्ड लोन पर प्रतिबंध से IIFL Finance के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। "आरबीआई के आदेश से लाभदायक गोल्ड लोन बुक के तेजी से अनवाइंडिंग होने के कारण कमाई पर असर पड़ सकता है। यह देखते हुए कि प्रतिबंध हटने का समय अनिश्चित है और हम मानते हैं कि प्रतिबंध 9 महीने तक रहेगा। इसलिए हमें उम्मीद है कि एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 1 प्रतिशत की गिरावट आएगी।" ब्रोकरेज फर्म ने कहा, वित्त वर्ष 2025 में सोने के एयूएम में सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।


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    इसके अलावा, एनालिस्ट्स ने FY25-26 प्रति शेयर आय (EPS) में 26 प्रतिशत-27 प्रतिशत कम किया है। इसके RoE में 460-480 बेसिस प्वाइंट (बीपीएस) की कटौती की। उन्होंने वित्त वर्ष 24-26 के दौरान ईपीएस चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 5 प्रतिशत और आरओई 15-15.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है।

    पिछले कुछ महीनों में, आरबीआई इन कमियों पर कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन और वैधानिक लेखा परीक्षकों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, अब तक कोई सार्थक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा कंपनी ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में कहा।

    ऐसा कहा जा रहा है कि, आरबीआई ने कंपनी को सामान्य कलेक्शन और रिकवरी प्रक्रियाओं के जरिये से अपने मौजूदा गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की सेवा जारी रखने की अनुमति दी है।

    डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

     

     

     

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