Brokerage Report : कोटक ने HDFC AMC के लिए अपना फेयर वैल्यू (FV) ₹3,000 से घटाकर ₹2,800 कर दिया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक कंपनी की अर्निंग्स में 15% की सालाना ग्रोथ देखने को मिल सकती है। कंपनी की अर्निंग को AUM में सालाना लगभग 18% की ग्रोथ और फीस में लगभग 3% की सलाना ग्रोथ से सपोर्ट मिलेगा।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने SBI फंड्स मैनेजमेंट पर 'बाय' रेटिंग और 600 रुपये की फेयर वैल्यू (FV) के साथ कवरेज शुरू किया है। जबकि HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी की रेटिंग को 'ऐड' से बढ़ाकर 'बाय' कर दिया है। ब्रोकरेज ने आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC की रेटिंग को 'ऐड' से घटाकर 'रिड्यूस' कर दिया है। इसकी वजह वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताएं बताई गई हैं।
कोटक ने ICICI प्रूडेंशियल AMC और निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट पर 'रिड्यूस' रेटिंग बनाए रखी है, जबकि UTI एसेट मैनेजमेंट कंपनी पर 'ऐड' रेटिंग बरकरार रखी है।
ब्रोकरेज का कहना है कि बड़े एसेट मैनेजरों को बड़े पैमाने पर काम करने, अच्छे परफॉर्मेंस ट्रैक रिकॉर्ड और मजबूत ब्रांड का फायदा मिलता है, लेकिन उन्हें फंड के परफॉर्मेंस में कमी, छोटी AMC से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिस्ट्रीब्यूटरों द्वारा ज़्यादा कमीशन वाले प्रोडक्ट को प्राथमिकता देने जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
कोटक ने कहा, "SBI AMC ने SBI के ब्रांच और डिजिटल इकोसिस्टम के साथ जुड़कर एक ऐसा फ़्रैंचाइज़ बनाया है जिसकी नकल करना मुश्किल है।" उन्होंने आगे कहा कि इससे "बहुत बड़े और ऐसे कस्टमर बेस" तक पहुंच मिलती है जहां अभी तक ज्यादा पहुंच नहीं बन पाई है और साथ ही इससे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट और रिटेल भागीदारी में भी बढ़ोतरी होती है।
कोटक ने ABSL AMC की रेटिंग घटाकर 'रिड्यूस' (Reduce) कर दी है और इसका फेयर वैल्यू (FV) ₹1,010 तय किया है। कोटक का कहना है कि FY2028E EPS के लगभग 25 गुना वैल्यूएशन में ऑपरेटिंग मेट्रिक्स में होने वाले संभावित सुधार पहले से ही शामिल हैं।
कोटक ने IPRU और Nippon पर 'रिड्यूस' रेटिंग बनाए रखी है। वहीं, UTI पर 'ऐड' (Add) रेटिंग बरकरार रखी है, हालांकि इसका फेयर वैल्यू ₹1,100 से घटाकर ₹1,020 कर दिया है। कोटक के मुताबिक UTI का वैल्यूएशन (एक साल आगे के कोर EPS का लगभग 14 गुना)अभी भी सस्ता है, लेकिन इसमें आगे की ग्रोथ खासकर फंड के परफॉर्मेंस और नेट इनफ्लो में लगातार सुधार पर निर्भर करेगी।
कोटक का कहना है कि इस सेक्टर में चुनिंदा शेयरों में अभी भी मौजूद हैं,लेकिन ये ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स में सुधार पर निर्भर करते हैं।
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