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Crude Oil में तेज गिरावट से इनफ्लेशन पर घटेगा दबाव, RBI दिसंबर में उम्मीद से कम बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा क्रूड ऑयल का आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतें बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Nov 05, 2026 पर 7:16 PM
Crude Oil में तेज गिरावट से इनफ्लेशन पर घटेगा दबाव, RBI दिसंबर में उम्मीद से कम बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट
अक्तूबर में केंद्रीय बैंक ने इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की थी।

क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। 5 नवंबर को ब्रेंट क्रूड का भाव घटकर करीब 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। अब इसमें थोड़ी तेजी दिखी है। भारतीय समय के मुताबिक, शाम 7 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। क्रूड के 100 डॉलर से नीचे आ जाने पर इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा। अगर यह 100 डॉलर से नीचे बना रहता है तो आरबीआई दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में पहले के अनुमान के मुकाबले कम वृद्धि कर सकता है।

क्रूड में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर 

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा क्रूड ऑयल का आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतें बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा होता है, जिसका असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है।

महंगाई रोकने के लिए इंटरेस्ट बढ़ाता है RBI

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