Daily Voice: ग्लोबल इकोनॉमिक मंदी और बढ़ती महंगाई के डर के बीच भारत सबसे बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। लेकिन इस सबके बावजूद हम दुनिया में घट रही घटनाओं के प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। इस समय दुनिया की सभी बड़ी इकोनॉमीज एक दूसरे से इतने गहरे रूप से जुड़ी हुई हैं कि किसी भी अच्छी या बुरी खबर का असर सब पर देखने को मिलता है। ये बातें श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर अजीत बनर्जी ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं।
दिसंबर तिमाही में कंपनियों पर बढ़ा ब्याज लागत का दबाव
दिसंबर तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस अवधि में आई 3000 से ज्यादा कंपनियों के नतीजों पर नजर डालें तो इनकी कमाई में सालाना आधार पर 17.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। जबकि इसी वित्त वर्ष की जून तिमाही में यह औसत 36 फीसदी का था। इसी तरह बैंकिंग और फाइनेंस कंपनियों के मजबूत नतीजों के चलते तीसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे में औसतन 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं पिछले साल की इसी अवधि में कंपनियों के औसत मुनाफे में 38.8 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी।
अगर हम बैंकिंग और फाइनेंस कंपनियों को निकाल दें तो 31 दिसंबर 2022 को खत्म हुई तीसरी तिमाही में कंपनियों के औसत मुनाफे में 10.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। दिसंबर तिमही में हमें लगातार दूसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली। इससे हमें इस बात का अंदाजा लगता है कि कंपनियों पर बढ़ती ब्याज लागत का कितना दबाव बन रहा है।
नए जमाने की टेक्नोलॉजी की आगे की डगर है मुश्किल
नए जमाने की टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नए जमाने की टेक कंपनियों ने अपना फोकस मुनाफा बढ़ाने और पॉजिटिव कैश फ्लो पर कर दिया है। लेकिन निवेशकों के रुख में बदलाव के लिए इन कंपनियों को लगातार कई तिमाही तक मुनाफे में रहना होगा। इसके साथ ही इनका मंहगा वैल्यूएशन भी जब तक सही लेवल पर नहीं आएगा तब तक इन कंपनियों पर निवेशकों का विश्वास नहीं बनेगा। वर्तमान स्थिति में ये कंपनियां काफी जोखिमपूर्ण नजर आ रही हैं।
बैंकिंग सेक्टर वित्त वर्ष 2024 के नजरिए से काफी अच्छा
वित्त वर्ष 2024 के लिए आपका सबसे पसंदीदा सेक्टर कौन होगा? इस सवाल का जवाब देते हुए बनर्जी ने कहा कि इस समय बैंकों के NPAलेवल काफी निचले स्तर पर हैं। साफ सुथरे और मजबूत बैलेंस सीट को देखते हुए बैंकिंग सेक्टर वित्त वर्ष 2024 के नजरिए से काफी अच्छा नजर आ रहा है। बनर्जी का कहना है कि भारतीय बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती घरेलू इकोनॉमी में आ रही सुस्ती और ग्लोबल बाजार की संभावित मंदी है।
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