eMudhra के शेयर में आज 20% की गिरावट दिख रही है और यह लोअर सर्किट पर है। कल भी इसमें इतनी ही गिरावट आई थी। सिर्फ दो दिन में यह शेयर करीब 40 फीसदी टूट चुका है। डिजिटल सिग्नेचर और ई-साइन जैसी सर्विसेस देने वाली eMudhra की 8 इंटरमीडिएट CA सर्टिफिकेट की प्राइवेट कीज लीक हो गई हैं। इसी के चलते यह शेयर दबाव में है। सरकार ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर जांच शुरू कर दी है और साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने इसको लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।
eMudhra की 8 डिजिटल Keys लीक होने से अफरातफरी मच गई है। 8 इंटरमीडिएट CA सर्टिफिकेट्स की प्राइवेट Keys लीक हुईं है। साइबर सुरक्षा एजेंसी ने जांच के लिए SIT बनाई है। Google, Apple और Microsoft ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स को ब्लॉक कर दिया है। keys इतनी कमजोर थीं कि कोई भी उन्हें आसानी से रिकवर कर सकता था। एक साइबर रिसर्चर ने Google, Apple और Mozilla को इसकी जानकारी दी। इन keys से कोई भी फर्जी TLS सर्टिफिकेट बना सकता था। नकली सर्टिफिकेट से वेबसाइट्स की नकल का खतरा था। अप्रैल 2025 में चाबियां बनाते वक्त मजबूत एन्क्रिप्शन नियम लागू नहीं किए गए।
eMudhra के बयान में कहा गया है कि कोई फर्जी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है। किसी भी असली वेबसाइट को कोई नकली लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। कंपनी का मेन सर्वर/सिस्टम हैक नहीं हुआ है। कंपनी का इन्फ्रास्ट्रक्चर हैक नहीं हुआ है और भारत में कंपनी का डिजिटल सिग्नेचर और eSign कारोबार पूरी तरह सुरक्षित है।
eMudhra एक 'की-जनरेशन' (key-generation) खामी से प्रभावित सिक्योरिटी प्रमाणपत्रों को बदलने का काम कर रही है। कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट कौशिक श्रीनिवासन ने 21 अक्टूबर को 'मनीकंट्रोल' को बताया कि इस प्रक्रिया में कुछ दिन लग सकते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि इस घटना का भारतीय वेबसाइटों और ऐप्लिकेशनों पर सीमित और बहुत कम समय के लिए असर पड़ा है और मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है।
X पर किए गए अगल-अलग पोस्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि उसने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसे सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ काम कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि ई-मुद्रा (eMudhra) के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) और ई-साइन (eSign) सेवाओं (जो MeitY के अंतर्गत 'कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथॉरिटीज' (CCA) द्वारा रेग्युलेटेड हैं), पर कोई असर नहीं पड़ा है।
प्राइवेट Keys लीक होने के खतरे
फर्जी सर्टिफिकेट से फर्जी बैंकिंग,सरकारी या पेमेंट साइट ब्राउजर में सिक्योर दिख सकती है। अटैकर्स एनक्रिप्टेड ट्रैफिक को पढ़ या बदल सकते हैं। खतरनाक सॉफ्टवेयर एक ट्रस्टेड पब्लिशर से आया हुआ दिख सकता है। ब्राउजर में असली वेबसाइट्स में वॉर्निंग मैसेज दिख सकते हैं।