Esperts views : वायदा कारोबार पर SEBI की सख्ती की तैयारी है। वीकली एक्सपायरी पर SEBI ने अपने हालिया बयान में कहा है कि जल्द ही F&O समयसीमा पर कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा। F&O कॉन्ट्रैक्ट अवधि बदलने पर पेपर लाया जाएगा। F&O कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बदलने पर विचार किया जा रहा है। कैश मार्केट वॉल्यूम बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। सेबी ने कहा है कि F&O में हेजिंग और लॉन्ग टर्म निवेश पर फोकस होगा।
मार्केट एक्सपर्ट मयंक बंसल से जाने F&O पर SEBI की सख्ती के क्या हैं मायने
इस मुद्दे पर खास चर्चा करते हुए दुबई में हेज फंड चलाने वाले मार्केट एक्सपर्ट मयंक बंसल ने कहा कि भारत के कैश मार्केट में उतनी गहराई नहीं है। वायदा बाजार बड़े ट्रेडर्स को लिक्विडिटी देता है। AMCs भी एक साथ बेचना चाहें तो मार्केट क्रैश हो सकता है। AMCs पुट खरीदकर या कॉल बेचकर पोजिशन हेज करते हैं। वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स में अच्छी लिक्विडिटी होती है। मंथली डेरिवेटिव में ज्यादा वॉल्यूम नहीं होते। सिर्फ हेजर्स के दम पर बाजार नहीं चल सकता। बाजार में वॉल्यूम की बड़ी दिक्कत है। मसलन USDINR में अब जीरो वॉल्यूम है।
मयंक बंसल ने आगे कहा कि डेली एक्सपायरी बंद होने और जेन स्ट्रीट के एक्जिट से रिटेल का घाटा वैसे ही कम होगा। रिटेल का घाटा 50 फीसदी कम होने की उम्मीद है। सभी मैच्योर मार्केट में वीकली एक्सपायरी होती है। इससे हर तरह के ट्रेडर्स के लिए जगह बनती है। अगर हमें रिटेल के घाटे की इतनी ही चिंता है तो इन्वेस्टर एजुकेशन पर फोकस किया जाए। एक खास नेटवर्थ से नीचे वालों को F&O की इजाजत ही ना दी जाए।
F&O पर सख्ती:SEBI के अब तक के कदम
F&O पर सख्ती से जुड़े SEBI के अब तक के कदम पर नजर डालें तो वीकली एक्सपायरी पर लगाम लगाई गई है। अब एक एक्सचेंज की सिर्फ एक वीकली एक्सपायरी होती है। इंडेक्स में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का लॉट साइज बढ़ा है। इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू कम के कम 15 लाख रुपए होनी चाहिए। मार्जिन के नियम सख्त किए गए हैं। मंथली एक्सपायरी के करीब मार्जिन बढ़ा है। एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड पर मार्जिन का फायदा खत्म हो गया है। MWPL कैलकुलेशन का तरीका बदला गया है।
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