पिछले महीने नेट सेलर रहने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मार्च तिमाही में भारतीय बाजारों में 7.3 बिलियन डॉलर डाले है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 3.2 बिलियन डॉलर निकाले हैं।
पिछले महीने नेट सेलर रहने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मार्च तिमाही में भारतीय बाजारों में 7.3 बिलियन डॉलर डाले है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 3.2 बिलियन डॉलर निकाले हैं।
Motilal Oswal के आकंड़ों से पता चलता है कि मार्च तिमाही में तिमाही दर तिमाही आधार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने Nifty-50 में शामिल कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 60 फीसदी तक बढ़ाई है। वहीं DIIs ने Nifty-50 में कंपनियों में इसी अवधि में 62 फीसदी घटाई है।
10 मई तक विदेशी निवेशकों ने निफ्टी मे शामिल 31 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। जिसमें Tata Steel, Hindalco, UPL, Wipro, ONGC, BPCL, ICICI Bank, Axis Bank SBI और Bajaj Finance शामिल हैं।
SBI Life Insurance, UPL, Hindalco, Tata Steel, Power Grid, Grasim, Hero MotoCorp और Cipla ऐस टॉप स्टॉक रहें जिनमें चौथी तिमाही में तिमाही आधार पर एफआईआई की होल्डिंग 1 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने इसी अवधि में BPCL, Bajaj Auto, IndusInd Bank, और SBI Life Insurance तिमाही आधार पर सबसे ज्यादा हिस्सेदारी (करीब 1 फीसदी से ज्यादा) बढ़ाई है।
FIIs शेयर होल्डिंग पैटर्न पर नजर डालें तो पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक उन सेक्टरों में पैसे डाल रहे हैं जहां कोविड-19 संक्रमण से फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा इनकी उन सेक्टरों और शेयरों पर भी नजर है जिनमें कोविड-19 की स्थिति सुधरने के बाद तेजी से बाउंसबैक देखने को मिल सकता है।
उपलब्ध आकंड़ो से पता चलता है कि चौथी तिमाही में तिमाही दर तिमाही आधार पर एफआईआई ने Telecom (+130bp), Metals (+100bp), Consumer Durables (+100bp), Real Estate (+80bp), Cement (+60bp), Chemicals (+60bp), Insurance (+50bp), और Healthcare (+40bp) में अपना वेटेज बढ़ाया है जबकि डीआईआई ने तिमाही आधार पर इन सेक्टरों में अपना वेटेज घटाया है।
SSJ Finance & Securities के Atish Matlawala का कहना है कि अगर कोविड-19 की वजह से लागू प्रतिबंध 45 दिन से ज्यादा बढ़ते हैं तो हमें आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टरों की तरफ निवेश शिफ्ट होता दिख सकता है। इसके चलते Consumer discretionary पर भी मार पड़ेगी।
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि कोविड-19 का ये असर अस्थाई होगा औऱ एक बार ग्रोथ लौटने पर हमें एफआईआई, बैंक और मेटल्स में जोरदार निवेश करते दिखेंगे।
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