भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जहां एक ओर लगातार लार्जकैप यानी बड़े शेयरों से पैसे निकाल रहे हैं। दूसरी ओर वे सरकारी कंपनियों (PSU) और स्मॉलकैप यानी छोटे शेयरों में चुपचाप निवेश बढ़ा रहे हैं। यह वही रणनीति है जो अब तक रिटेल निवेशक सफलता के साथ अपनाते रहे हैं। शेयर बाजार में सूचीबद्ध 79 सरकारी कंपनियों (PSUs) ने अब तक अपनी मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग आंकड़े जारी किए हैं। इनमें से 52% कंपनियों में एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसी तरह, निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स की 186 कंपनियों में से 51% में FIIs ने निवेश बढ़ाया है।
मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में भी बढ़ती रुचि
विदेशी निवेशकों ने स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी अच्छी रुचि दिखाई है। उन्होंने BSE MidCap की 107 कंपनियों में से 43% में मार्च तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं BSE SmallCap की 730 कंपनियों में से 42% कंपनियों में FIIs ने अपनी शेयर होल्डिंगबढ़ाई है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को अक्सर जोखिम लेने वाले FIIs पसंद करते हैं क्योंकि इनमें बेंचमार्क इंडेक्सों को मात देने की क्षमता होती है। एनालिस्ट्स ने कहा कि रेवेन्यू और मार्जिन से जुड़ी चिंताओं के बावजूद, ये स्टॉक आम तौर पर ग्लोबल घटनाओं से कम प्रभावित होते हैं, जो इनके पक्ष में जाता है। वहीं PSUs स्टॉक्स में ऐसा लग रहा है कि विदेशी निवेशक हालिया गिरावट के बाज एवरेज डाउन कर रहे हैं यानी अपने पिछले निवेश को औसत कर रहे हैं। कई PSUs स्टॉक्स में 50 फीसदी से अधिक की तेज गिरावट देखी गई थी, जिसके चलते इनका भाव आकर्षक हो गया था।
क्यों हो रहा है लार्ज-कैप से मोहभंग?
अब तक Nifty50 की 36 कंपनियों ने अपनी मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग आंकड़े जारी किए हैं। इनमें से केवल 5 कंपनियों में ही विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं, निफ्टी100 की 73 कंपनियों में से 53% में विदेशी निवेशकों की होल्डिंग घटी है।
इंडिपेंडेंट रिसर्च एनालिस्ट दीपक जसानी के मुताबिक, लार्ज-कैप शेयरों में विदेशी निवेशकों की रुचि घटने का मुख्य कारण इन कंपनियों में इनकी अधिक हिस्सेदारी और ग्लोबल अनिश्चितता है। जैसे कि ट्रेड वॉर और जियोपॉलिटिकल तनाव। इसके चलते इन कंपनियों के रेवेन्यू और मुनाफे की स्पष्टता पर असर पड़ा है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं।
मार्च तिमाही में निवेश का हाल
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मार्च तिमाही के दौरान ₹1.16 लाख करोड़ से अधिक की शुद्ध बिकवाली की। निफ्टी इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 100 में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई। जबकि BSE MidCap में 11% और BSE SmallCap में 15% की तेज गिरावट हुई।
रणनीति: रिस्क और रिवार्ड का संतुलन
इंडिपेंडेंट रिसर्च एनालिस्ट अजय बग्गा का कहना है कि FIIs अब एक "डुअल स्ट्रैटेजी" अपना रहे हैं। एक तरफ वे घरेलू डिफेंस सेक्टर जैसे सुरक्षित माने जाने वाले सेगमेंट में निवेश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर छोटे और संभावित मल्टीबैगर स्टॉक्स में भी पैसा लगा रहे हैं।
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