जुलाई में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टमेंट ने बनाया 11 महीने का रिकॉर्ड

फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) ने जुलाई में 466.18 अरब रुपये (5.63 अरब डॉलर) के शेयर खरीदे। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के डेटा के मुताबिक, अगस्त 2022 के बाद यह किसी महीने में सबसे ज्यादा FPI इनफ्लो है। FPI में बढ़ोतरी से निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। जुलाई में निफ्टी 50 में 2.94 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई

अपडेटेड Aug 04, 2023 पर 6:37 PM
मार्च से जुलाई के दौरान यानी पिछले 5 महीने में FPI शेयर बाजार में नेट बायर रहे हैं।

फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) ने जुलाई में 466.18 अरब रुपये (5.63 अरब डॉलर) के शेयर खरीदे। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा के मुताबिक, अगस्त 2022 के बाद यह किसी महीने में सबसे ज्यादा FPI इनफ्लो है। FPI में बढ़ोतरी से निफ्टी 50 (Nifty 50) और बीएसई सेंसेक्स ( BSE Sensex) रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। जुलाई में निफ्टी 50 में 2.94 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई।

मार्च से जुलाई के दौरान यानी पिछले 5 महीने में FPI शेयर बाजार में नेट बायर रहे हैं। इस दौरान , फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स ने 1,553.08 अरब रुपये के शेयर खरीदे और निफ्टी 50 इंडेक्स में 14.15% की बढ़ोतरी हुई। एसक्वायर कैपिटल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (Esquire Capital Investment Advisors) के CEO एस दास गुप्ता ने बताया, 'जुलाई में सूचकांकों के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की इसकी मुख्य वजह विदेशी फंडों में बढ़ोतरी रही। अगर आप म्यूचुअल फंड को देखें, तो पिछले कुछ महीनों में जबरदस्त मुनाफावसूली हुई है।'

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मजबूत मैक्रोइकनॉमिक फंडामेंटल्स, बेहतर नतीजे और चीन में रिकवरी को लेकर चिंताओं की वजह से भारत में पूंजी निवेश में बढ़ोतरी हुई। इस हफ्ते के शुरू में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने भारत की रेटिंग को 'इक्वल वेट' से अपग्रेड कर 'ओवरवेट' कर दिया है। साथ ही, मैक्रो-इकनॉमिक स्थिरता और बेहतर अर्निंग आउटलुक के मामले में भारत को इमर्जिंग मार्केट्स का सबसे बेहतर विकल्प बताया है।


FPI ने जुलाई में क्या खरीदा

FPI ने जुलाई में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में 115.14 अरब डॉलर के शेयर खरीदे। जून में यह आंकड़ा 192.29 अरब डॉलर था। अप्रैल और मई में FPI इस सेक्टर में नेट बायर रहे। मोतालाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) ने जून तिमाही के आंकड़ों से जुड़ी अंतरिम समीक्षा में कहा है, 'बैंकों में अर्निंग ग्रोथ बनी रही और एसेट क्वालिटी में भी सुधार जारी रहा, जबकि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों में डिस्बर्समेंट की रफ्तार बेहतर रही।'

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