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FPI Buying in India: विदेशी निवेशकों ने ₹20199 करोड़ डाले भारतीय शेयरों में, 66% तो आया खास रूट से, वजह भी स्पेशल

FPI Buying in India: भारतीय स्टॉक मार्केट में एक बार फिर रौनक दिखने लगी है। इसके साथ ही विदेशी निवेशक भी लौटते दिखाई दे रहे हैं। जुलाई में उन्होंने भारतीय इक्विटीज में ₹20,199 करोड़ डाले जिसमें से 66% से अधिक हिस्सा तो खास रास्ते से आया आया। डेट मार्केट में भी उनकी अच्छी झलक दिखी। डिटेल्स में पढ़ें

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Aug 02, 2026 पर 9:14 AM
FPI Buying in India: विदेशी निवेशकों ने ₹20199 करोड़ डाले भारतीय शेयरों में, 66% तो आया खास रूट से, वजह भी स्पेशल
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार ने दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट के तेज उठा-पटक को ही भारतीय मार्केट में विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी की मुख्य वजह बताया है।

FPI Buying in India: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने पिछले महीने जुलाई में अपनी बिकवाली का सिलसिला थाम दिया। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयरों की बिकवाली से अधिक खरीदारी की यानी वे नेट खरीदार बन गए। उन्होंने कुल ₹20,199 करोड़ के शेयर खरीदे। इसमें से ₹6,731 करोड़ स्टॉक एक्सचेंज के जरिए आए, तो ₹13,467 करोड़ प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी के जरिए भारतीय मार्केट में आए। सिर्फ इक्विटी मार्केट ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों ने पिछले महीने डेट मार्केट में भी काफी हलचल बढ़ा दी और NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) के आंकड़ों के मुताबिक अकेले जनरल लिमिट कैटेगरी के जरिए ही उन्होंने ₹29,211 करोड़ डाले।

क्या है विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ खरीदारी की वजह?

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार ने दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट के तेज उठा-पटक को ही भारतीय मार्केट में विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी की मुख्य वजह बताया है। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भारी वोलैटिलिटी और चिप ट्रेड के कंसंट्रेशन रिस्क के चलते विदेशी निवेशक भारत जैसे स्थिर बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके अलावा रुपए की स्थिरता और भारतीय मार्केट में लार्ज कैप के बेहतर वैल्युएशन ने निवेश को सपोर्ट किया है। विजयकुमार के मुताबिक विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ निवेश की एक अहम बात ये है कि वे अपना निवेश भारतीय मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़ा रहे हैं क्योंकि लार्ज कैप की तुलना में इन सेगमेंट्स में ग्रोथ की गुंजाइश अधिक है।

जुलाई में कैसी रही भारतीय मार्केट की चाल

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