FPI का नहीं बढ़ रहा भरोसा; सितंबर में अब तक भारतीय शेयरों से निकाले ₹13138 करोड़; किन कारणों से सेलर

FPI's Selling in September: सितंबर में हुई ताजा शेयर ​बिक्री के साथ साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 2.37 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। FPIs ने भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली की है

अपडेटेड Sep 13, 2026 पर 11:32 AM
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सितंबर के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार से 13,138 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर जैसे कारण हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले जुलाई और अगस्त में FPI भारतीय शेयरों में शुद्ध खरीदार रहे थे। जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि, मार्च से जून तक लगातार 4 माह भारतीय शेयरों में बिकवाली की थी।

सितंबर में हुई ताजा शेयर ​बिक्री के साथ साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 2.37 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने 11 सितंबर तक भारतीय शेयरों से 13,138 करोड़ रुपये की निकासी की है।

एक्सपर्ट्स की राय


न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रमुख कारण घरेलू परिस्थितियां नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौर में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी का बाहर निकलना स्वाभाविक है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग में प्रमुख ब्याज दरें बढ़ने की ज्यादा संभावना ने भी निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला है।

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जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती महंगाई के कारण मौद्रिक नीति सख्त हो सकती है, जिससे बॉन्ड यील्ड और बढ़ने की संभावना है। अगर अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड पर यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंचती है, तो वैश्विक शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर अधिक रिटर्न देने वाले बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं।

डेट मार्केट का हाल

विदेशी निवेशकों ने भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली की है। उन्होंने सितंबर में अब तक फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए 1,350 करोड़ रुपये और जनरल रूट के जरिए 955 करोड़ रुपये निकाले। वहीं वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत 29 करोड़ रुपये का निवेश किया।

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