HAL के शेयरों में मई और जून में निवेशकों ने जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई। लेकिन, फंड मैनेजर्स ने अलग रुख अपनाया। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) ने मई और जून में जिन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली की, उनमें HAL भी शामिल था। फंड मैनेजर्स ने मई में HAL (Hindustan Aeronautics) के 28 लाख शेयर बेचे। जूने में उन्होंने इसके 45 लाख शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी और मार्च में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने एचएएल के शेयर खरीदे थे। उन्होंने जनवरी में 16 लाख और मार्च में 40 लाख शेयर खरीदे थे।
चाल का सही अंदाजा नहीं लगा सके फंड मैनेजर्स
ऐसा लगता है कि फंड मैनेजर्स HAL के शेयरों की चाल का सही अंदाजा लगाने में चूक गए। इस साल 3 अप्रैल को एचएएल का शेयर 2,712 रुपये था। यह बढ़कर 30 जून को 3,792 रुपये पर पहुंच गया। यह करीब 40 फीसदी का उछाल है। यह शेयर 11 जुलाई को 3,917.45 रुपये के लाइफ-टाइम हाई पर पहुंच गया।
सरकारी कंपनियों में AMC की दिलचस्पी नहीं
एचएएल के शेयर में पिछले तीन महीनों में 37 फीसदी की तेजी आई है। एक साल में यह स्टॉक 120 फीसदी चढ़ा। Lamron Ivestments के स्मॉलकेस मैनेजर सौमित्र सेनगुप्ता ने कहा, "HAL के शेयर का प्रदर्शन बीते एक साल में शानदार रहा है। हमने 2022 की अंतिम तिमाही से एचएएल के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना शुरू किया है।" सरकारी कंपनियां (Public Sector Enterprises) में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की ज्यादा दिलचस्पी नहीं रही है। इसकी वजह उनकी एफिशिएंसी और प्रोडक्टविटी से जुड़े मसले हैं।
OFS के बाद 60 फीसदी चढ़ा शेयर
यह आम धारणा रही है कि PSE का प्रबंधन अच्छा नहीं रहा है। इसलिए एएमसी पीएसई के लिए हाई ग्रोथ प्रीमिमय चुकाने को तैयार नहीं रहते हैं। लिस्टिंग के बाद ही एचएएल के शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। Rupeeting के मेहुल पारिख ने कहा कि पिछले तीन साल में इस स्टॉक का प्राइस 4.5 गुना हो गया है। मार्च 2023 में ऑफर फॉर सेल (OFS) के बाद से यह स्टॉक करीब 60 फीसदी चढ़ चुका है। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि एचएएल के शेयरों में पिछले दो महीनों में हुई बिकवाली की वजह इसक वैल्यूएशन बढ़ना और मुनाफावसूली है। पिछली तिमाही मार्केट में आई तेजी में डिफेंस कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन शानदार रहा है। इस वजह से भी एचएल में बिकवाली हुई है।"
एचएएल की ऑर्डरबुक अच्छी है। यह करीब 82,000 करोड़ रुपये की है। यह फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में कंपनी के रेवेन्यू का तीन गुना है। इसमें कंपनी को मिले एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स मैन्युफैक्चरिंग के ऑर्डर का बड़ा हाथ है। ब्रोकरेज फर्म फिलिपकैपिटल ने कहा है कि एचएएल के पास अगले दस साल के लिए 48 अरब डॉलर का ऑर्डर है।
लड़ाकू विमान बनाने के बड़े ऑर्डर्स
इंडिया में स्कैवड्रन की संख्या अभी 31 है, जबकि इसे 42 होना चाहिए। ऐसे फाइटर एयरक्राफ्ट की सबसे ज्यादा जरूरत एयरफोर्स को है। सरकार ने मिग विमानों को साल 2025-26 तक इस्तेमाल से हटाने का फैसला किया है। इनकी जगह तेजस जैसे सिंगल इंजन एयरक्रॉफ्ट लेंगे। जहां तक हेलीकॉप्टर की बात है तो लाइट कम्बैट हेलीकॉपटर्स को लेकर HAL का रोडमैप क्लियर है।