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F&O के खेल पर सेबी की सख्ती, मिनिमम लॉट 5 लाख से बढ़ाकर 20-30 लाख रुपए करने की सिफारिश, समझिए पूरा मामला

पिछले कुछ समय में डेरिवेटिव्स सौदों में रिटेल इनवेस्टर्स की भागीदारी बढ़ी है। इस वजह से ट्रेडर्स मार्केट में जमकर सट्टेबाजी कर रहे हैं जिसकी वजह से रिटेल इनवेस्टर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी मुश्किल से निपटने के लिए सेबी ने एक पैनल बनाया और सुझाव मांगे थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 09, 2024 पर 2:29 PM
F&O के खेल पर सेबी की सख्ती, मिनिमम लॉट 5 लाख से बढ़ाकर 20-30 लाख रुपए करने की सिफारिश, समझिए पूरा मामला
शेयर बाजार के डेरिवेटिव्स सौदों में सट्टेबाजी को रोकने के लिए सेबी ने उठाया कदम

फ्यूचर्स-ऑप्शंस सौदों में होने वाली गड़बड़ी को किस तरह रोका जाए, ये जानने-समझने के लिए एक वर्किंग कमिटी बनाई गई थी। इस वर्किंग कमिटी की सिफारिश है कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स का मिनिमम लॉट साइज 20 से 30 लाख रुपए के बीच कर दिया जाए। फिलहाल डेरिवेटिव का मिनिमम लॉट 5 लाख रुपए का होता है। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया डेरिवेटिव्स के बेलगाम वॉल्यूम ग्रोथ पर लगाम लगाने के लिए वीकली ऑप्शन की हर एक्सचेंज पर हर हफ्ते सिर्फ एक एक्सपायरी तय करने की सिफारिश की गई है। अभी हर रोज कोई ना कोई एक्सपायरी होती है।

शेयर मार्केट रेगुलेटर सेबी ने पिछले महीने यह वर्किंग कमिटी बनाई थी। इसमें इस सेक्टर के कई एक्सपर्ट्स शामिल थे। पिछले कुछ सालों में फ्यूचर्स-ऑप्शंस सौदों में रिटेल इनवेस्टर्स की भागीदारी बढ़ने से सट्टेबाजी काफी बढ़ गई है। इसी समस्या से निपटने के लिए सेबी ने वर्किंग कमिटी का गठन किया था।

F&O को ट्रेडिंग का हीरो या जीरो माना जाता है। एक झटके में यहां अच्छे पैसे बन सकते हैं या पूरी पूंजी डूब सकती है। ऐसे में सट्टेबाजों के चंगुल से रिटेल इनवेस्टर्स को बचाने के लिए सेबी ने कमिटी से सिफारिश मांगी थी। क्योंकि इस तरह के सौदों में छोटे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

सिफारिशें मानी गईं तो क्या होगा असर 

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