GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार की सुबह GIFT निफ्टी में गिरावट देखने को मिली है। जिससे भारतीय बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी के लिए कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। बाजार को घरेलू GDP में मजबूत ग्रोथ से सहारा मिल सकता है,लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार का मूड खराब रहने की संभावना है

अपडेटेड Sep 01, 2026 पर 10:40 AM
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एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से इकोनॉमिक ग्रोथ के मोर्चे पर बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।


US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी आर का मानना ​​है कि निफ्टी का रुख सतर्क से लेकर कमजोर बना रहेगा। इसमें 24,200 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम करेगा,जबकि 24,300-24,400 का स्तर अगला बड़ा रेजिस्टेंस होगा। 24,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है,तो निफ़्टी 23,900-23,800 के स्तर तक जा सकता है।

पिछले सेशन में FIIs की तरफ से बिकवाली तेज होने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो एक अहम चिंता का विषय बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 31 अगस्त को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,588 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सपोर्ट करना जारी रखा।

 

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