Adani मामले के शांत होने का इंतजार कर रहे विदेशी निवेशक, भारत में देख रहे लंबी-अवधि के मौके

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से ही अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी जा रही है। जानकारों का कहना है अडानी ग्रुप से जुड़ी खबरों के चलते शेयर बाजार में कुछ अल्पकालिक अनिश्चितता पैदा हो सकती है, लेकिन भारतीय बाजार को लेकर लंबी अवधि का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है

अपडेटेड Feb 22, 2023 पर 3:10 PM
विदेशी निवेशक तेजी से भारत में मौजूद अवसरों को पहचान रहे हैं

अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने जनवरी के आखिरी हफ्ते में एक रिपोर्ट जारी कर अडानी ग्रुप (Adani Group) पर अकाउंटिंग फ्रॉड और शेयरों की कीमत में छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। इस रिपोर्ट के बाद से ही अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी जा रही है। जानकारों का कहना है अडानी ग्रुप से जुड़ी खबरों के चलते शेयर बाजार में कुछ अल्पकालिक अनिश्चितता पैदा हो सकती है, लेकिन भारतीय बाजार को लेकर लंबी अवधि का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।

रेमंड जेम्स इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट, मैट ऑर्टन ने हमारे सहयोगी न्यूज चैनल CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें अभी भी अडानी ग्रुप से जुड़ी कुछ खबरें आती दिख रही हैं और वह निवेश से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले इस मामले के शांत होने का इंतजार करेंगे।

उन्होंने कहा, “अभी भी अडानी एंटरप्राइजेज से जुड़ी खबरें आ रही हैं। मैं मामले को शांत होने देना चाहता हूं। हालांकि मैं अभी भी चीन और लैटिन अमेरिका से ज्यादा भारत में अवसरों की तलाश कर रहा हूं। मेरी इमर्जिंग मार्केट की सूची में भारत और साउथ-ईस्ट एशिया सबसे ऊपर हैं क्योंकि वे व्यापक EM कॉम्प्लेक्स से पीछे रह गए हैं।


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ऑर्टन ने भारतीय बाजार में भरोसा जताया और कहा कि भारत ग्लोबल स्तर पर चलने वाले नैरेटिव से थोड़ा अछूता है। ऑर्टन के अनुसार, इसके चलते भारतीय बाजार एक स्थिरता की भावना पैदा करते हैं और निवेश के लिए अनुकूल माहौल मुहैया कराते हैं।

उन्होंने आईटी और आईटी सर्विसेज जैसे सेक्टर में मार्जिन के बढ़ने की संभावना को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि ये सेक्टर हाल के सालों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और डिजिटलाइजेशन में तेजी जारी रहने के चलते ये आगे बढ़ने के लिए भी तैयार हैं।

ऑर्टन ने कहा कि वह अधिक विदेशी निवेश को भारत में वापस आते हुए देख रहे हैं। यह भारतीय इकोनॉमी के लिए एक अच्छा संकेत है और यह बताता है कि निवेशक तेजी से भारत में मौजूद अवसरों को पहचान रहे हैं।

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