सरकार चार सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाने की तैयारी में, दो और बैंकों का जल्द हो सकता है निजीकरण -रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने 2021-22 के बजट में घोषणा की थी कि वह IDBI बैंक के अलावा दो सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी का प्राइवेटाइजेशन करेगी। नियमों का पालन करने के लिए सरकार चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% कर सकती है। इस योजना का लक्ष्य तीन से चार बड़े सरकारी बैंक बनाना है। प्राइवेटाइजेशन और विलय के लिए कानूनी बदलावों की जरूरत होगी

अपडेटेड Oct 23, 2026 पर 9:53 AM
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सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर द इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया है कि पहली प्राथमिकता अगले एक साल में इन चार बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना है

सरकार चार सरकारी बैंकों सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75% करने पर विचार कर रही है,ताकि न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों का पालन किया जा सके। शुक्रवार को इकोनॉमिक टाइम्स में आई एक खबर के मुताबिक केंद्र सरकार सरकारी बैंकों के एक और विलय की तैयारी कर रही है। प्राइवेटाइजेशन के लिए दो और बैंकों की पहचान की जा सकती है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2021-22 के बजट में घोषणा की थी कि वह IDBI बैंक के अलावा दो सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी का प्राइवेटाइजेशन करेगी।

इस महीने की शुरुआत में सरकार ने बताया था कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा द्वारा प्रोमोटेड फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स, IDBI बैंक में 52,878 करोड़ रुपये में 60.72% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी।


'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार का लॉन्ग टर्म टारगेट तीन से चार बड़े सरकारी बैंक ही रखना है। खबरों के मुताबिक,नीति आयोग ने प्राइवेटाइजेशन के संभावित टारगेट के रूप में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को शॉर्टलिस्ट किया है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर द इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया है कि पहली प्राथमिकता अगले एक साल में इन चार बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाना है। हालांकि बैंक अपनी-अपनी रणनीतियों के अनुसार बाजार से फंड जुटा सकते हैं, लेकिन सरकार बाजार की स्थितियों को देखते हुए 'ऑफर फॉर सेल' के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक फ्लोट अधिक होने से इन बैंकों के वैल्यूएशन में भी सुधार होने की उम्मीद है।

एक अन्य अधिकारी ने 'द इकोनॉमिक टाइम्स'को बताया कि कंसोलीडेशन की इस प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी की अनुकूलता, भौगोलिक पहुंच और बिजनेस मिक्स जैसे कारकों पर विचार किया जाएगा। बैंकों से भी इस प्रक्रिया पर सुझाव मिलने की उम्मीद है।

बैंकों के निजीकरण के लिए विधायी संशोधनों की जरूरत होगी,जिसमें 'बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम' में बदलाव भी शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि इन संशोधनों को बैंकों के विलय की प्रक्रिया के साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वित्तीय संस्थानों सहित सरकारी कंपनियों को अगस्त 2026 तक 25% की न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की शर्त से छूट दी थी। उम्मीद है कि इस छूट को और आगे बढ़ाने की अधिसूचना जारी की जाएगी।

 

 

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