सरकार की आक्रामक विनिवेश नीति से पीएसयू शेयरों को लेकर बना डर, क्या इनमें करना चाहिए निवेश!

एसजेवीएन की आक्रामक कीमत ने निवेशकों को परेशान कर दिया है। सरकार के इस आक्रामक कदम ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे पीएसयू शेयरों में गिरावट देखी जा रही है। बाजार मूल्य से कम कीमत पर विनिवेश को सरकार की तरफ से आक्रामक तरीके से आगे बढ़ने के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऐसे में दूसरी सरकारी कंपनियों के शेयरों में में भी गिरावट आने की संभावना बढ़ गई है

अपडेटेड Sep 23, 2023 पर 4:33 PM
20 सितंबर को, सरकार ने एसजेवीएन में 4.95 फीसदी हिस्सेदारी 69 रुपये के भाव पर बेचने के अपने फैसले की घोषणा की। यह भाव 20 सितंबर के बाजार भाव से 15.59 फीसदी कम है। वर्तमान में ये स्टॉक 71.15 रुपये पर कारोबार कर रहा है, जो कि विनिवेश के भाव से 0.03 फीसदी ज्यादा है

सरकार की तरफ से मार्केट प्राइस से भारी डिस्काउंट पर हिस्सेदारी बेचने के फैसले के ऐलान के बाद एसजेवीएन के शेयर में 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इसके चलते सरकारी कंपनियों में गिरावट की संभावना को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार मूल्य से कम कीमत पर विनिवेश को सरकार की तरफ से आक्रामक तरीके से आगे बढ़ने के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऐसे में दूसरी सरकारी कंपनियों के शेयरों में में भी गिरावट आने की संभावना बढ़ गई है।

बाजार मूल्य से कम कीमत पर विनिवेश को लेकर सरकार द्वारा अपनाए जा रहे आक्रामक तरीके को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इससे सरकारी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। केंद्र सरकार की कंपनियों से मिल कर बना एनएसई सीपीएसई इंडेक्स 22 सितंबर को 1.68 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था। ये इंडेक्स इस साल 36 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा है।

20 सितंबर को, सरकार ने एसजेवीएन में 4.95 फीसदी हिस्सेदारी 69 रुपये के भाव पर बेचने के अपने फैसले की घोषणा की। यह भाव 20 सितंबर के बाजार भाव से 15.59 फीसदी कम है। वर्तमान में ये स्टॉक 71.15 रुपये पर कारोबार कर रहा है, जो कि विनिवेश के भाव से 0.03 फीसदी ज्यादा है।


विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ के एक हालिया नोट में कहा गया है, "पीएसयू स्टॉक हालिया रैली के चलते फिर से सुर्खियों में हैं, संभवत: 2023 के राज्य चुनावों और 2024 के आम चुनावों से पहले सरकार पर विनिवेश के लिए दबाव बना हुआ।"

जेफ़रीज़ के महेश नंदुरकर के एक बयान में कहा, "निकट अवधि में विनिवेश प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। भारी चुनावी कैलेंडर के चलते सरकार पर सामाजिक खर्च को बढ़ाने का दबाव रह सकता है। इन खर्चों में किसानों को वार्षिक आधार पर होने वाला फंड ट्रांसफर, स्वास्थ्य बीमा का विस्तार करने और होम लोन पर ब्याज सब्सिडी देने जैसी योजनाएं शामिल हैं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के फंडामेंटल रिसर्च, ब्रोकिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की एवीपी स्नेहा पोद्दार ने कहा कि भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2024 के लिए 51000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। इसे हासिल करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। इसलिए, सरकार ने साल के अंत से पहले कुछ विनिवेश हासिल करने के लिए एसजेवीएन ओएफएस का भाव बहुत एग्रेसिव रखा है।

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क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

बाजार जानकारों का कहना है कि सरकार ने विनिवेश के लिए बहुत एग्रेसिव प्राइसिंग की है। इससे स्टॉक प्राइस पर दवाब बन सकता है। लेकिन ये दबाव अस्थाई होगा। पोद्दार ने इस बात पर जोर दिया कि निवेशकों को पीएसयू शेयरों पर विश्वास नहीं खोना चाहिए। पीएसयू शेयरों अर्थव्यवस्था के खुलने से उत्पन्न होने वाले बड़े अवसरों को भुनाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। तमाम सेक्टरों में सरकार की तरफ से होने वाले पूंजीगत व्यय में बढ़त और स्वदेशीकरण पर जोर बढ़ने से सार्वजनिक उपक्रमों की ऑर्डर बुक में मजबूती आई है। जिससे आगे इनकी कमाई में बढ़त की अच्छी संभावना है।

स्नेहा पोद्दार ने आगे कहा कि पीएसयू शेयर अभी भी तुलनात्मक रूप से अंडर-ओन्ड हैं, और इनका वैल्यूएशन सस्ता है। ऐसे में अब तक आई जोर दार तेजी के अभी भी इन शेयरों में काफी वैल्यू बची हुई है। इतनी तेजी के बाद भी इनका वैल्यूशन अभी भी अच्छे स्तरों पर है। ऐसे में इनका रिस्क रिवार्ड रेशियो काफी अच्छा दिख रहा है।

 

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