HDFC Bank के बारे में कई ब्रोकरेज फर्मों ने अपनी राय अचानक बदल दी हैं। इसकी वजह एचडीएफसी बैंक की एनालिस्ट कॉल है। इसमें बैंक के मैनेजमेंट ने अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति और संभावनाओं के बारे में बताया है। इसमें कहा गया है कि अकाउंटिंग एडजस्टमेंट की वजह से एचडीएफसी बैंक की बुक वैल्यू इसमें एचडीएफसी के विलय से पहले के मुकाबले कम होगी। इसके बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने HDFC Bank पर अपनी राय बदल दी है। इसके स्टॉक के टारगेट प्राइस को भी घटा दिया है। किसी कंपनी के टोटल एसेट में से टोटल लायबिलिटी को घटाने पर बुक वैल्यू मिलती है। 20 सितंबर को एचडीएफसी बैंक के स्टॉक में बड़ी गिरावट आई। सुबह 9:30 बजे इसका शेयर 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर 1,578 रुपये पर आ गया था।
नोमुरा ने रेटिंग न्यूट्रल की
ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने एचडीएफसी बैंक के स्टॉक पर अपनी रेटिंग 'न्यूट्रल' कर दी है। ब्रोकरेज फर्म के एनालिस्ट्स ने कहा कि विलय के बाद एचडीएफसी बैंक की बुक वैल्यू प्रति शेयर 23 रुपये पर आ गई है। इसलिए इस स्टॉक के टारगेट प्राइस को 1,920 रुपये से घटाकर 1,800 रुपये कर दिया गया है। नए टारगेट प्राइस का मतलब है कि एचडीएफसी बैंक के शेयर की कीमत 10 फीसदी बढ़ सकती है।
बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में कमी
नोमुरा ने यह भी कहा कि अगले 2 से 3 तिमाहियों में बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में बैंक का ओपनिंग बुक नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2 फीसदी है, जो पहली तिमाही में 2.7 फीसदी था। विलय के बाद बैंक के पास आई ज्यादा लिक्विडिटी इसकी वजह है। इस आधार पर नोमुरा ने नेट एनआईएम के अनुमान को इस फाइनेंशियल ईयर में 0.25 फीसदी घटा दिया है। FY25 और FY26 के दौरान इसमें 15-20 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की गई है।
Citi ने टारगेट प्राइस घटाया
Citi ने एचडीएफसी बैंक के शेयरों को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। हालांकि, उसने इसके शेयर का टारगेट प्राइस घटाकर 2,110 रुपये कर दिया है। उसने कहा है कि बैंक का नॉन-इंडिविजुअल NPA को जून में 6.7 फीसदी कर दिया गया है। मार्च में यह 3.7 फीसदी था। उसने कहा है कि एनपीए में तेज बढ़ोतरी एचडीएफसी लिमिटेड की कॉरपोरेट लोन बुक की वजह से हुई है, जो निगेटिव है।
जेफरीज ने भी टारगेट प्राइस में कमी की
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने भी एचडीएफसी बैंक के शेयरों को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। लेकिन, उसने भी इसका टारगेट प्राइस को घटाकर 2030 रुपये कर दिया है। उसने कहा है कि एचडीएफसी के नॉन-परफॉर्मिंग लोन ज्यादा हैं। एचडीएफसी बैंक के लोन में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है। अब एचडीएफसी बैंक के स्टॉक में 1 साल की फॉरवर्ड बुक वैल्यू के 2.5 गुना पर कारोबार हो रहा है। यह ICICI Bank के करीब बराबर है, जबकि उसकी लोन ग्रोथ और आरओए आउटलुक कम है।