कमजोर बाजार में भी ऑटो स्टॉक्स मार्च के अपने निचले स्तरों से तेजी दिखाते नजर आए हैं। हालांकि बीच में 2 बार करेक्शन भी देखने को मिला है। मार्च 2022 में सेंसेक्स-निफ्टी अपने 1 साल के निचले स्तर पर जाते नजर आए थे और जुलाई 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर छुआ था। पिछले हफ्ते भी सेंसेक्स और निफ्टी ने बीएसई पर 52 हफ्ते का अपना नया लो बनाया था।
कमजोर ग्लोबल संकेत और यूएस फेड सहित दूसरे केंद्रीय बैंकों द्वारा महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक तरीके से की जाने वाली बढ़ोतरी ने मार्केट सेंटीमेंट पर अपना असर दिखाया है। एक बार घरेलू इक्विटी मार्केट मार्च 2022 के निचले स्तरों के भी नीचे फिसल गए। हालांकि बाद में आई शॉर्ट कवरिंग के चलते थोड़ी रिकवरी देखने को मिली है।
Piper Serica के फाउंडर और फंड मैनेजर अभय अग्रवाल का कहना है कि बाजार अब तक की लगभग सभी खराब घटनाओं और खबरों को पचा चुका है। बाजार में यह आम धारणा है कि महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। बाजार यह भी मान कर चल रहा है कि डॉलर में मजबूती रहेगी, कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती हैं और यूक्रेन की समस्या जल्द समाप्त नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में कोई पॉजिटिव सरप्राइस बाजार में अच्छी तेजी ला सकता है। इसकी एक वजह यह है कि अब तक काफी बिकवाली हो चुकी है। अगर ऊपर गिनाई गई चुनौतियों का कोई लॉन्ग टर्म समाधान आता है तो बाजार में निचले स्तरों से जबरदस्त तेजी आ सकती है।
खास बात ये है कि भारतीय और ग्लोबल बाजार में कमजोरी के बावजूद ऑटो स्टॉक मार्च के अपने निचले स्तरों से तेजी दिखाते नजर आए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 8 मार्च से 22 जून 2022 के बीच करीब 14 फीसदी भागा है जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 इंडेक्स में 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
अलग-अलग स्टॉक्स पर नजर डालें तो इस अवधि में Mahindra & Mahindra में 40 फीसदी, TVS Motor rose में 39 फीसदी , Ashok Leyland में 34 फीसदी और Eicher Motors में 18 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। इसी तरह इस अवधि में Maruti Suzuki,Hero MotoCorp और Balkrishna Industries में 10-14 फीसदी की तेजी आई है। हालांकि इस अवधि में ऑटो सेक्टर से संबंधित 3 शेयर ऐसे रहे हैं जिनमें गिरावट देखने को मिली है। इनमें Amara Raja Batteries, Bosch और Exide Industries के नाम शामिल हैं।
अब सवाल यह है कि ऑटो सेक्टर में इस रिकवरी की वजह क्या है? जानकारों का कहना है कि मेटल प्राइस में गिरावट और सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों के दूर होने की वजह से भी ऑटो सेक्टर में रिकवरी आई है। अभय अग्रवाल को कहना है कि ऑटो सेक्टर अच्छा नजर आ रहा है। सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतें कम होने और स्टील की कीमतें घटने से ऑटो सेक्टर को फायदा होगा। घरेलू मांग में मजबूती दिख रही है इसके अलावा मानसून के अच्छे रहने की संभावना से ऑटो सेक्टर खासकर टू-व्हीलर सेगमेंट से अच्छी ग्रामीण मांग आने की संभावना है।
Wright Research की सोनम श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले साल बैक बेंचर रहा ऑटो सेक्टर मार्च से तेजी दिखा रहा है। सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें दूर होने और डिमांड पर बना दबाव कम होने के चलते ऑटो सेक्टर में तेजी आ रही है। उन्होंने आगे कहा कि ऑटो सेक्टर के वॉल्यूम में सरकार द्वारा स्टील की प्राइस हटाने के लिए उठाए गए कदमों के बाद बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
सोनम श्रीवास्तव का कहना है कि वह टू-व्हीलर स्टॉक को लेकर बुलिश हैं। आगे ग्रामीण डिमांड में आने वाले तेजी के चलते ट्रैक्टर और पैसेंजर व्हीकल के मांग में तेजी आ सकती है।
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