अभी निवेशकों को न तो डरने और न ही लालच करने की जरूरत है, इन 8 प्वाइंट्स में जानिए आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है
स्टॉक मार्केट्स में 5 अगस्त को आई गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट्स में बिकवाली है। अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने की आशंका बढ़ी है। जियोपॉलिटकल स्थितियां चिंता पैदा करती हैं। जहां तक घरेलू मार्केट की बात है तो एकमात्र चिंता वैल्यूएशन को लेकर दिखती है
MoneyControl News
अपडेटेड Aug 07, 2024 पर 1:41 PM
इंडिया की इकोॉमिक ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रोथ वाली इकोनॉमी है। लेकिन, स्टॉक मार्केट हमेशा इकोनॉमी का आईना नहीं होता है।
दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने कहा था कि स्टॉक मार्केट में मोटी कमाई खरीदने और बेचने से नहीं होती है बल्कि इंतजार करने से होती है। यह मछली मारने जैसा है। आपको पहले पानी की दिशा के हिसाब से चुपचाप बैठ जाना होता है। इसे हम दो तरह से समझ सकते हैं। पहला, आपको अपना होमवर्क करना है। फिर सही शेयर खरीदने हैं। फिर कंपाउंडिंग के मैजिक से अपने छोटी मछली के व्हेल में बदल जाने का इंतजार करना होता है।
दूसरा, आप दांव लगाने के लिए सही मौके का इंतजार कर सकते हैं। आप तब खरीदते हैं जब बाजार में कत्लेआम मचा होता है, जब हर कोई बाजार से भागने की कोशिश कर रहा होता है। सवाल यह है कि 5 अगस्त को आई गिरावट के बाद क्या खरीदारी का बड़ा मौका है? या क्या यह सभी शेयरों को बेचकर हमेशा से बाजार से बाहर निकल जाने का वक्त है?
1. क्या मार्केट में गिरावट बढ़ सकती है?
अभी बाजार पर तीन खराब खबरों का असर दिख रहा है। पहला, अमेरिका में मंदी की आशंका, येन कैरी ट्रेड में अनवाइंडिंग और रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई बढ़ने की आशंका जिसमें ईरान भी शामिल हो सकता है।
2. उम्मीद की किरण
ऊपर बताई गई चीजों में से किसी का असर इंडिया पर सीधे तौर पर पड़ने वाला नहीं है। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि इंडियन मार्केट्स ग्लोबल क्राइसिस से पूरी तरह से अछूता नहीं रह सकता। भले ही विदेशी निवेशकों का अब ज्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा लेकिन ग्लोबल ट्रेड, लॉजिस्टिक्स, मनी कॉस्ट और कमोडिटी की कीमतों का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ना तय है। इसलिए शेयरों की कीमतों पर भी असर दिखेगा।
2. क्या इससे इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बेपटरी हो सकती है?
इसका जवाब नहीं है। इंडिया की इकोॉमिक ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रोथ वाली इकोनॉमी है। लेकिन, स्टॉक मार्केट हमेशा इकोनॉमी का आईना नहीं होता है। निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है। वैश्विक हालात पर असर डालने वाली चीजों का असर ग्रोथ, इनफ्लशन और फॉरेन निवेश पर पड़ेगा। इससे इंडियन मार्केट्स भी प्रभावित हो सकता है।
3. अगर ग्लोबल मार्केट्स में गिरावट आती है तो इंडियन मार्केट्स भी गिरेंगे?
हां, लेकिन संभवत: बहुत ज्यादा नहीं। इंडियन कंपनियों के प्रॉफिट पर उतना ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि हमारी इकोनॉमी का ज्यादा फोकस घरेलू फैक्टर्स पर है। इसके अलावा घरेलू निवेशकों की तरफ से विदेशी निवेशकों के मुकाबले मार्केट में ज्यादा लिक्विडिटी आ रही है।
4. तो क्या इस गिरावट पर खरीदारी करना चाहिए?
कोविड की महामारी शुरू होने के बाद से हर गिरावट पर बाजार में खरीदारी हुई है। इंडियन स्टॉक्स में आगे अच्छे रिटर्न देने की क्षमता है। लेकिन, अभी वैल्यूएशन का जो लेवल है, उस पर खरीदारी बहुत अट्रैक्टिव नहीं है। हालांकि, यह घबराहट में शेयरों को बेचने का भी समय नहीं है।
5. क्या स्मॉलकैप शेयरों में निवेश बनाए रखना चाहिए?
स्मॉलकैप सेगमेंट के शेयर सस्ते नहीं रह गए हैं। कुछ शेयर तो बहुत महंगे हो गए हैं। निफ्टी 50 की वैल्यू ठीक लग रही है। लेकिन, मिडकैप स्टॉक्स और स्मॉलकैप स्टॉक्स की कीमतें आसमान में पहुंच गई हैं। इससे इनमें रिस्क दिख रहा है। कुछ स्टॉक्स में आगे अच्छी ग्रोथ स्टोरी दिख सकती है। लेकिन इनमें ज्यादा उतारचढ़ाव दिख सकता है। हालांकि, घबराहट में शेयरों को बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन, निवेशकों को ज्यादा सुरक्षित, कम उतारचढ़ाव वाले लॉर्जकैप स्टॉक्स में शिफ्ट होना ठीक रहेगा।
6. क्याआपको अपना SIP रोक देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। शेयर अब भी सेविंग्स के लिए बहुत अच्छा जरिया हैं। शेयरों और रियल एस्टेट्स ने हमेशा लंबी अवधि में इनफ्लेशन के असर को एडजस्ट को करने के बाद काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। छोटी अवधि के उतारचढ़ाव आते रहते हैं। लेकिन, लंबी अवधि की ग्रोथ पर इसका असर पड़ने वाला नहीं है।
7. किन शेयरों या स्टॉक्स से बचने की जरूरत है?
अभी निवेश के लिए ऐसे सेक्टर और शेयरों पर फोकस करने की जरूरत है, जिनका बिजनेस इंडिया से जुड़ा है और जिनकी निर्भरता एक्सपोर्ट पर नहीं है। डिफेंस और रेलवे स्टॉक्स बहुत महंगे हो गए हैं। उनमें बिकवाली की जा सकती है। आपको हर कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं को देखने के बाद निवेश का फैसला लेने की जरूरत है।
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8. क्या ऐसे शेयरों में निवेश करना चाहिए जिनकी कीमतें 10-15 फीसदी तक गिर गई हैं?
नहीं, उन शेयरों में ज्यादा गिरावट आती है, जिनकी कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ी होती हैं। अगर किसी स्टॉक में उसकी अर्निंग्स के 100 गुना पर ट्रेृडिंग हो रही है तो 10 फीसदी की गिरावट के बाद भी उसमें 90 गुना पर कारोबार होता रहेगा।