Iran Conflict Impact: इन 7 कंपनियों का मिडिल ईस्ट में है बड़ा कारोबार, शेयरों में दिख सकती है बड़ी हलचल

Iran Conflict Impact: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर दिख सकता है। कई कंपनियों की कमाई और ऑर्डर बुक का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। चेक करें पूरी लिस्ट।

अपडेटेड Mar 01, 2026 पर 7:25 PM
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Kalyan Jewellers की कुल कंसोलिडेटेड टॉपलाइन का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है।

Iran Conflict: वीकेंड में हुए घटनाक्रम का असर सोमवार सुबह वैश्विक शेयर बाजारों में दिख सकता है। हालात तेजी से बदले हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की खबर आई। इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई की। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की भी खबर है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। बाजार अब इन्हीं संकेतों पर प्रतिक्रिया देगा।

ऐसे हालात में उन भारतीय कंपनियों पर खास नजर रहेगी, जिनका कारोबार और प्रोजेक्ट मिडिल ईस्ट से जुड़े हैं और जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र से आता है।

Larsen & Toubro


देश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का मिडिल ईस्ट में बड़ा दांव लगा हुआ है। इसके कुल कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक का करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय कारोबार से आता है।

कुल अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बुक में से 80 प्रतिशत से ज्यादा सऊदी अरब, UAE और मिडिल ईस्ट क्षेत्र से जुड़ा है। कंपनी ने हाल ही में भी इस क्षेत्र में कई बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं।

Kalyan Jewellers

ज्वैलरी रिटेलर की कुल कंसोलिडेटेड टॉपलाइन का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। दिसंबर तक कंपनी के वहां 36 से 38 स्टोर थे। कंपनी आगे भी इस क्षेत्र में विस्तार की योजना बना रही है।

KEC International

ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेवाएं देने वाली इस कंपनी की सऊदी अरब और UAE में मजबूत मौजूदगी है। हाल ही में कंपनी को सऊदी अरब से 1,064 करोड़ रुपये का 380 केवी लाइन ऑर्डर और 1,038 करोड़ रुपये का GIS सबस्टेशन ऑर्डर मिला है।

तीसरी तिमाही की अर्निंग कॉल में मैनेजमेंट ने कहा था कि वह मिडिल ईस्ट में कई प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनी है और इनका आवंटन चौथी तिमाही में हो सकता है।

Welspun Corp

कंपनी ने अपने ऑर्डर बुक का सटीक मिडिल ईस्ट एक्सपोजर नहीं बताया है, लेकिन सऊदी अरब में उसकी मजबूत मौजूदगी है और वहां से उसे कई ऑर्डर मिले हैं। कंपनी क्षेत्र में करीब 1,700 करोड़ रुपये का कैपेक्स निवेश कर रही है।

इसमें 2,50,000 एमटीपीए डक्टाइल आयरन पाइप प्लांट शामिल है, जो मार्च 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। साथ ही 3,50,000 एमटीपीए की LSAW लाइन पाइप यूनिट भी लगाई जा रही है, जिसका मकसद सऊदी अरामको और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करना है।

Sterling & Wilson Renewables

इस EPC सर्विस प्रोवाइडर ने भी मिडिल ईस्ट में मौजूदगी के सटीक आंकड़े साझा नहीं किए हैं। लेकिन तीसरी तिमाही की निवेशक प्रस्तुति के अनुसार सऊदी अरब, UAE और ओमान में उसके ऑपरेशन हैं। यानी इस क्षेत्र में उसका सीधा एक्सपोजर है।

VA Tech Wabag

तीसरी तिमाही की अर्निंग कॉल में मैनेजमेंट ने बताया था कि कंपनी सऊदी अरब में 200 एमएलए अल हैर एसटीपी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके अलावा 300 एमएलडी यनबू मेगा डीसैलिनेशन प्लांट पर भी काम जारी है।

इस प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत जल्द होने की उम्मीद है। बेसिक इंजीनियरिंग का काम पूरा हो चुका है और जरूरी स्टाफ तैनात किया जा चुका है। मैनेजमेंट का कहना था कि मिडिल ईस्ट, खासकर GCC देशों में डीसैलिनेशन, वेस्टवाटर ट्रीटमेंट और रीयूज से जुड़े प्रोजेक्ट्स में लगातार अवसर बने हुए हैं।

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