IRDAI ने इश्योरेंस कंपनियों को दिया जोर का झटका, 7% तक टूटे HDFC लाइफ और ICICI प्रूडेंशियल के शेयर
Insurance Stocks : गुरुवार को शुरुआती कारोबार में HDFC Life और ICICI Prudential Life के शेयरों में 7-8% की गिरावट देखने को मिली है। IRDAI की ओर से इंश्योरेंस कमीशन और खर्च के ढांचे में प्रस्तावित बदलावों के कारण डिस्ट्रीब्यूशन इकोनॉमिक्स और ग्रोथ पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं पैदा हो गईं। इसके चलते
Insurance Stocks : ब्रोकरेज का मानना है कि नए बिज़नेस पर कमीशन कम होने से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर फिनटेक कंपनी PB फिनटेक और टर्टलमिंट की कमाई पर असर पड़ सकता है
Insurance Stocks : गुरुवार को इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। इसकी वजह बीमा कमीशन और खर्च के ढांचे में प्रस्तावित बदलाव हैं, जिनसे इन कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन इकोनॉमिक्स और ग्रोथ पर असर पड़ने का डर पैदा हो गया। शुरुआती कारोबार में HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के शेयर 7.2% गिरकर 521 रुपये पर आ गए,जबकि ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के शेयर 7.5% गिरकर 448 रुपये पर आ गए।
वैसे आज पूरे बाजार में ही गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि,इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में शेष बाजार की तुलना में ज्यादा गिरावट आई है। सुबह 10:45 बजे के आसपास सेंसेक्स 669.78 अंक या 0.90 प्रतिशत गिरकर 74,158.47 पर और निफ्टी 217.75 अंक या 0.93 प्रतिशत गिरकर 23,229.05 पर दिख रहा था।
लाइफ इंश्योरेंस शेयरों पहले से ही मुश्किल में चल रहे हैं। IRDAI से मिले झटके ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है । HDFC लाइफ के शेयर 2026 में अब तक करीब 30 प्रतिशत गिर चुके हैं,जबकि ICICI प्रूडेंशियल लाइफ में 33.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी तुलना में इसी दौरान निफ्टी में 11.1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
क्या रही गिरावट की वजह?
इंश्योरेंस सेक्टर पर IRDAI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है जो उम्मीद से एकदम विपरीत रहा है। इसी वजह के इन शेयरों पर दबाव बना है। इस पेपर में IRDAI ने एक्सपेंस-ऑफ-मैनेजमेंट (EOM) और कमीशन ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके बाद इन शेयरों की बिकवाली आई है। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि इन बदलावों से इंश्योरेंस वितरण के आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव आ सकता है।
कमीशन में प्रस्तावित कटौती उम्मीद से कहीं ज़्यादा बड़ी, इंडस्ट्री की तरफ से होगा काफी विरोध
बर्नस्टीन का कहना है कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती उम्मीद से कहीं ज़्यादा बड़ी है। इससे PB फिनटेक (पॉलिसीबाज़ार) पर सबसे ज़्यादा असर पड़ने की संभावना है। ब्रोकरेज ने आगे कहा कि इससे इंश्योरेंस कंपनियों के हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस ग्रोथ पर भी कुछ असर पड़ सकता है,हालांकि LIC और SBI लाइफ़ अपनी कम लागत और ज़्यादा एजेंसी और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान मिक्स के कारण तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं। इन पर इस पेपर में प्रस्तावित बदलावों का सबसे कम असर देखने को मिल सकता है।
बर्नस्टीन को उम्मीद है कि इन प्रस्तावों का इंडस्ट्री की तरफ से काफी विरोध होगा। उसने यह भी कहा कि डिस्ट्रीब्यूशन की लागत घटने का फायदा ग्राहकों को मिल सकता है और इससे वॉल्यूम में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।
ब्रोकर चैनलों की तुलना में टाइड एजेंट्स को ज्यादा प्राथमिकता
मैक्वेरी ने कहा कि प्रस्तावित EOM फ्रेमवर्क में बैंकाश्योरेंस और ब्रोकर चैनलों की तुलना में टाइड एजेंट्स को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इन प्रस्तावों के तहत, प्योर-टर्म पॉलिसी पर पहले साल का कमीशन 25-30 प्रतिशत तक सीमित होगा। जबकि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए EOM की सीमा 12.5 प्रतिशत और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए पांच साल की अवधि में 20 प्रतिशत तय की जाएगी।
मैक्वेरी ने आगे कहा कि प्रस्तावित बदलावों का LIC और SBI Life पर तुलनात्मक रूप से कम असर पड़ेगा,जबकि PB Fintech पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ने की आशंका है। बैंकों की बात करें तो मैक्वेरी का मानना है कि SBI, ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की तुलना में एक्सिस बैंक और HDFC बैंक पर ज़्यादा असर पड़ सकता है।
इन बदलावों का मकसद इंश्योरेंस को ज़्यादा किफायती बनाना और बीमा की पहुंच बढ़ाना है
HSBC का कहना है कि IRDAI का प्रस्ताव इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कॉस्ट स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव का संकेत है और इसका इंश्योरेंस कंपनियों,ब्रोकरों और लेंडर्स पर बड़ा असर पड़ सकता है। HSBC के अनुसार,SBI Life पर इसका असर सबसे कम पड़ने की संभावना है,जबकि HDFC Life, Max Financial Services और PB Fintech पर इसका ज़्यादा असर पड़ सकता है। इन प्रस्तावित बदलावों का मकसद इंश्योरेंस को ज़्यादा किफायती बनाना और इसकी पहुंच बढ़ाना है।
PB फिनटेक और टर्टलमिंट की कमाई पर पड़ेगा बड़ा असर
उधर जेफ़रीज़ की राय है कि इस कंसल्टेशन पेपर में हेल्थ,टर्म और मोटर इंश्योरेंस के लिए EOM लिमिट को सख्त करने और कमीशन को एक-तिहाई से लेकर आधे तक घटाने का प्रस्ताव है। ब्रोकरेज का मानना है कि नए बिज़नेस पर कमीशन कम होने से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर फिनटेक कंपनी PB फिनटेक और टर्टलमिंट की कमाई पर असर पड़ सकता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कमीशन दरों में 10 प्रतिशत की कटौती से इन दोनों डिस्ट्रीब्यूटर की कमाई में 10-12 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
हालांकि,जेफ़रीज़ का मानना है कि इन प्रस्तावों का SBI लाइफ़,स्टार हेल्थ और ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस पर सीधा असर कम ही होगा। इससे इन कंपनियों को मार्केट-शेयर बढ़ने और मार्जिन में बढ़ोतरी का फ़ायदा हो सकता है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।