Jio financial Services Share Listing: रिलायंस इंडस्ट्रीज की फाइनेंशियल इकाई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों का अलॉटमेंट पूरा हो गया है। कंपनी के शेयरों का भाव 261.85 रुपए तय किया गया है। Jio financial Services के शेयर 10 अगस्त को शेयरहोल्डर्स के खातों में आ गए हैं। जिन निवेशकों के पास पहले से RIL के शेयर थे उन्हें Jio financial Services के शेयर मुफ्त दिए गए हैं। यानि अगर किसी के पास 10 RIL के शेयर थे तो उसके डिमैट अकाउंट में अब Jio financial Services के 10 शेयर जुड़ गए हैं। इसके बाद ही अब शेयरों की लिस्टिंग होने वाली है।
Jio financial Services को पहले ही निफ्टी 50 और सेंसेक्स में शामिल कर लिया गया है। जब तक इसके शेयरों की इंडिपेंडेंट लिस्टिंग नहीं हो जाती तब तक इसके शेयर भाव में कोई बदलाव नहीं होगा। 28 अगस्त को लिस्टिंग के बाद तीन दिन के भीतर इसे सभी सूचकांकों से हटा दिया जाएगा।
कैसे तय हुई थी Jio financial Services के शेयरों की कीमतें
Jio financial Services के शेयरों का भाव 261.85 रुपए तय किया गया है। पिछले महीने यानि जुलाई 2023 में स्टॉक एक्सचेंज पर एक स्पेशल सेशन के जरिए जियो फाइनेंशियल के शेयरों का भाव डिस्कवर किया गया था। यह भाव ब्रोकरेज के अनुमान से ज्यादा है। ब्रोकरेज से 190 रुपए शेयर प्राइस रहने का अंदाजा लगाया था। जबकि रिलायंस के लिए Jio financial Services की एक्विजिशन कॉस्ट 133 रुपए है।
Jio financial Services के शेयरों के मौजूदा भाव के मुताबिक, इसका मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। इसी के साथ रिलायंस की यह फाइनेंशियल कंपनी देश की दूसरी सबसे बड़ी NBFC बन चुकी है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि RIL से अलग होने के बाद Jio Financial Services एक बड़ी NBFC कंपनी बनेगी जिससे बजाज फाइनेंस जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिल सकती है। CNBC TV 18 से बात करते हुए Stellar Wealth Partners India Fund के मैनेजिंग डायरेक्टर और फंड मैनेजर गौतम बैद्य ने कहा था, "रिलायंस ट्रेजरी शेयरों में 6.1 फीसदी हिस्सेदारी और दूसरे एसेट्स के आधार पर जियो फाइनेंशियल का नेटवर्थ करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए है। जबकि बजाज फाइनेंस के पास 44,000 करोड़ रुपए का नेटवर्थ और 2.7 लाख करोड़ रुपए का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) है।"
मैक्वायरी ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि अभी यह अंदाजा लगाना जल्दीबाजी होगी कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज किस कस्टमर सेगमेंट और टारगेट मार्केट को अपनी सर्विस देगी। अभी तक ऐसा लगता है कि इसका फोकस कंज्यूमर और मर्चेंट लेंडिंग पर रह सकता है। और यही बजाज फाइनेंस का कोर बिजनेस है। ऐसे में आगे यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियों की रणनीति क्या होती है।