Jio IPO: लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म मार्केट कैप के हिसाब से देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनने की कगार पर है। ₹1119 के ऑफर प्राइस के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश वाली डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ बैठ रही है। मनीकंट्रोल की एनालिसिस के मुताबिक सिर्फ यही नहीं, जियो की लिस्टिंग के बाद रिलायंस ग्रुप भी अपनी सभी कंपनियों के मार्केट कैप को मिलाकर देश का सबसे बड़ा लिस्टेड बिजनेस ग्रुप बनने वाला है।
Jio IPO को मिला ताबड़तोड़ रिस्पांस
जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30188 करोड़ के आईपीओ को निवेशकों का ताबड़तोड़ रिस्पांस मिला और 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ।
पब्लिक इश्यू और एंकर इंवेस्टर प्लेसमेंट मिलाकर इसकी डिमांड ₹7.4 लाख करोड़ के पार पहुंच गई तो एप्लीकेशंस की संख्या 1.39 करोड़ पहुंच गई। एंकर बुक को छोड़कर इसके आईपीओ को ₹4.9 लाख करोड़ से अधिक की बोलियां मिली।
खास बात ये है कि इश्यू खुलने के पहले 100 मिनट के भीतर ही यह पूरा भर गया, जोकि देश के आईपीओ इतिहास में एक रिकॉर्ड है। साथ ही QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) के लिए आरक्षित ₹5500 करोड़ का हिस्सा तो पहले 10 मिनट में ही पूरा भर गया।
इसके आईपीओ की डिमांड हर कैटेगरी में मजबूत दिखी। एंकर निवेशकों को निकाल दिया जाए तो QIB ने ₹3.87 लाख करोड़, HNI (हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स) ने ₹57 हजार करोड़ और खुदरा निवेशकों ने ₹26 हजार करोड़ की बोली लगाई। साथ ही एंप्लॉयीज ने ₹1,450 करोड़ और शेयरहोल्डर्स ने ₹19,000 करोड़ की बोली लगाई।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित हिस्सा 7.60 गुना तो एंप्लॉयीज का हिस्सा 2.93 गुना सब्सक्राइब हुआ।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से रुपये को सपोर्ट!
जियो के आईपीओ को लेकर मजबूत मांग ऐसे समय में देखने को मिली, जब दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव रहा। घरेलू स्टॉक मार्केट से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस साल 2026 की शुरुआत से अब तक करीब $3300 करोड़ की बिकवाली की थी, और इसी दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) लगभग 13% टूट गया। इन परिस्थितियों के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स को कुल $7800 करोड़ की बोली मिली। आईपीओ में हिस्सा लेने के लिए विदेशी निवेशकों ने डॉलर को रुपये में बदला, जिससे डॉलर की सप्लाई बढ़ी। इससे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपये को सहारा मिला।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।