LIC के शेयरों की लिस्टिंग ने इनवेस्टर्स को निराश किया है। मंगलवार को शेयर 8 फीसदी से ज्यादा डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुए। पूरे दिन सीमित दायरे में चढ़ते-उतरते रहे। कारोबार के अंत में लिस्टिंग प्राइस के आसपास ही बंद हुए। इस शेयर ने इनवेस्टर्स को लिस्टिंग के पहले दिन मुनाफावसूली का कोई मौका नहीं दिया। बुधवार को शेयरों में तेजी दिखी। लेकिन, मुनाफावसूली के चलते यह घट गई।
सरकार ने एलआईसी के शेयरों की कमजोर लिस्टिंग की वजह स्टॉक मार्केट के कमजोर सेंटिमेंट को बताया है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी तुहिन कांत पांडेय ने मंगलवार को कहा था कि मार्केट की अनिश्चितता इस शेयर की कमजोर लिस्टिंग की वजह है।
पांडेय ने इनवेस्टर्स को एलआईसी के शेयरों को लंबे समय तक रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "कोई मार्केट के बारे में अनुमान नहीं लगा सकता। हम पहले से कहते आ रहे हैं कि इस शेयर को आपको लंबे समय के लिए रखना है।" उन्होंने शेयरों की लिस्टिंग के बाद संवाददाताओं के सवाल के जवाब में यह बात कही।
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने एलआईसी के आईपीओ को अट्रैक्टिव बनाने के लिए हर उपाय किए। उसने तीन कैटेगरी के इनवेस्टर्स को अच्छा डिस्काउंट दिया। एंप्लॉयीज और पॉलिसीहोल्डर्स के लिए इश्यू का कुछ हिस्सा रिजर्व रखा। इसके बावजूद एलआईसी का आईपीओ इनवेस्टर्स को खुश करने में नाकाम रहा।
अगर सरकार एलआईसी के शेयरों का अट्रैक्शन बढ़ाना चाहती है तो वह शेयरहोल्डर्स के लिए बंपर डिविडेंड का ऐलान कर सकती है। सऊदी अरब की ऑयल कंपनी सऊदी अरामको ने ऐसा किया है। सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी है। यह कंपनी 2019 में रियाद स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। अब इसने एपल से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का ताज छिन लिया है।
सऊदी अरामको ने अपने शेयरहोल्डर्स को कम से कम 2024 तक सालाना 75 अरब डॉलर डिविडेंड देने का वादा किया है। कंपनी ने 2019 में लिस्टिंग के बाद अपने शेयरों को मजबूती देने के लिए यह ऐलान किया था। सऊदी अरामको ने दुनिया के सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार के लिए एलआईसी के शेयरों को सपोर्ट करना जरूरी है। पहला, इसकी वजह यह है कि सरकार ने अपनी कई कंपनियों में डिसइनवेस्टमेंट का प्लान बनाया है। इसके लिए जरूरी है कि एलआईसी का शेयर इनवेस्टर्स के लिए अट्रैक्टिव होने चाहिए। अगर एलआईसी जैसी कंपनी के शेयर का बुरा हाल होगा तो इनवेस्टर्स दूसरी सरकारी कंपनियो के आईपीओ से दूरी बना सकते हैं।
दूसरा, सरकार को पांच साल के अंदर में एलआईसी में अपनी कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचनी है। इसके लिए एलआईसी के शेयरों का अट्रैक्टिव होना जरूरी है। अगर उसके शेयर कमजोर बने रहते हैं तो सरकार को इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने में दिक्कत आएगी।