SEBI चीफ माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) और उनके पति धवल बुच ने हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg) द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी नई रिपोर्ट में सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर कई आरोप लगाए हैं। एक आरोप के मुताबिक रिसर्च फर्म ने दावा किया है सेबी चीफ की सैलरी से कई गुना ज्यादा कमाई उनकी कंसल्टिंग फर्म से होती है। बुच ने इसके जवाब में कहा कि सेबी चीफ द्वारा सिंगापुर में अपने कार्यकाल के दौरान स्थापित की गई दो कंसल्टिंग कंपनियां - एक भारत में और एक सिंगापुर में - सेबी में उनकी नियुक्ति के बाद निष्क्रिय हो गईं। यह जानकारी बुच और उनके पति ने एक ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट जारी करते हुए दी है।
Madhabi Buch ने जवाब में क्या कहा?
बुच दंपति ने संयुक्त बयान में कहा, "ये कंपनियां (और उनमें उनकी शेयरहोल्डिंग) स्पष्ट रूप से सेबी को उनके खुलासे का हिस्सा थीं।" प्रेस स्टेटमेंट में स्पष्ट किया गया कि 2019 में यूनिलीवर से धवल बुच की रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इन एंटिटीज का उपयोग करके अपना स्वयं का कंसल्टेंसी बिजनेस शुरू किया। उन्होंने कहा,"सप्लाई चेन में धवल की एक्सपर्टाइज के चलते उन्हें इंडियन इंडस्ट्री में प्रमुख क्लाइंट्स के साथ काम करने का मौका मिला। इस तरह, इन कंपनियों में अर्जित आय को माधबी के वर्तमान सरकारी वेतन से जोड़ना दुर्भावनापूर्ण है।"
उन्होंने कहा, सिंगापुर स्थित एंटिटी में धवल बुच को शेयरहोल्डिंग के ट्रांसफर की सूचना सेबी के साथ-साथ सिंगापुर और भारतीय कर अधिकारियों को भी दी गई। यह बयान हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा यह आरोप लगाए जाने के बाद जारी किया गया है कि माधबी बुच और उनके पति की कथित अदाणी मनी साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल की गई ऑफशोर एंटिटी में हिस्सेदारी थी।
Hindenburg ने Madhabi Buch पर लगाए हैं ये आरोप
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन कंसल्टिंग बिजनेस Agora Advisory की ओनरशिप माधबी बुच के पास है। इस कंपनी में उनकी 99 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें उनके पति डायरेक्टर हैं। अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 7 मई 2013 को भारत में की गई थी। कंपनी की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक फिस्कल ईयर 2022 में इस कंपनी को कंसल्टिंग से 1.98 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। यह माधबी पुरी बुच की सेबी की होल टाइम मेंबर की सैलरी का 4.4 गुना था। आज तक इस कंपनी में 99 फीसदी हिस्सेदारी माधबी बुच की है।
हिंडनबर्ग के डॉक्यूमेंट के मुताबिक, अप्रैल 2017 से लेकर मार्च 2022 के बीच सेबी चेयरपर्सन रहते हुए माधबी बुच सिंगापुर की ऑफशोर कंसल्टिंग फर्म Agora Partners की 100 फीसदी मालकिन थीं। माधबी 1 मार्च 2022 को सेबी की चेयरपर्सन बनी। और इसके दो हफ्ते के भीतर 16 मार्च 2022 को उन्होंने इस कंसल्टिंग कंपनी का मालिकाना हक पति को सौंप दिया।
माधबी बुच ने अप्रैल 2017 में सेबी की होल टाइम मेंबर बनी थीं। इसके बाद 1 मार्च 2022 को वह सेबी की चेयरपर्सन बनी थीं। सिंगापुर में मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक, 16 मार्च 2022 तक माधबी बुच के बाद Agora Partners की 100 फीसदी हिस्सेदारी थी। इस कंपनी को फाइनेंशियल स्टेटमेंट डिस्क्लोज करने से पूरी छूट थी। इसलिए इस बात का पता नहीं चल पाया है कि इस कंपनी ने उनकी क्या कमाई होती थी। हिंडनबर्ग का कहना है कि चेयरपर्सन माधबी बुच की ईमानदारी को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इस कंपनी ने उनकी कितनी कमाई होती थी।