Market correction: जानिए किन सेक्टर में आई सबसे ज्यादा गिरावट, निवेशकों को कहां मिल सकते हैं खरीदारी के मौके

Market correction: शेयर बाजार में गिरावट के चलते सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव है। रियल्टी, FMCG और ऑटो सेक्टर में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मार्केट में हालिया करेक्शन निवेश के फैसलों पर दोबारा सोचने का मौका है। हमें गिरते हुए शेयरों में जल्दबाजी में निवेश करने के फैसले से बचना चाहिए। मार्केट एक्सपर्ट मजबूत फंडामेंटल और ग्रोथ पर फोकस करने की सलाह दे रहे हैं

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 11:11 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
Market correction: रिटेल निवेशकों के लिए,अलग-अलग समय पर निवेश करने से एक ही मार्केट लेवल पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम हो सकता है

Market correction: शेयर बाजार में हालिया गिरावट ने निवेशकों के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह गिरावट अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते भाव पर खरीदने का मौका देते हैं,या फिर यह अर्निंग और ग्रोथ को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत हैं? बाजार जानकारों का कहना है कि सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव के बीच,निवेशकों को सिर्फ गिरावट पर ध्यान देने के बजाय यह देखना चाहिए कि क्या किसी सेक्टर के फंडामेंटल उसकी मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं।

सोमवार को सेंसेक्स 547 अंक गिरकर 71,924 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 157 अंक गिरकर 22,363 पर बंद हुआ था।

सितंबर महीने में सभी चार बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली है। निफ्टी में 6.06 फीसदी और निफ्टी 500 में 5.88 प्रतिशत की गिरावट आई है। मिडकैप की सबसे ज्यादा पिटाई हुई है। निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में 7.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। स्मॉलकैप का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा है। फिर भी निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 3.12 प्रतिशत की गिरावट आई है जो निफ्टी 50 की गिरावट से आधे से भी कम है।


मार्केट में गिरावट गहराने के साथ ही इस पर बात हो रही है कि रिकवरी आने पर कौन से सेक्टर सबसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। यह बात ध्यान में रखने की जरूरत है कि शेयर की कीमतों में भारी गिरावट का मतलब यह नहीं है कि स्टॉक अपने आप में सस्ता हो गया है। निवेशकों को गिरावट के कारणों,कॉर्पोरेट अर्निंग के आउटलुक और भविष्य की ग्रोथ के लिए वे जो कीमत चुका रहे हैं उन सभी बातों पर नजर रखनी चाहिए।

किन सेक्टरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट?

निफ्टी रियल्टी इंडेक्स का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। 9 अक्टूबर, 2026 तक की 1 महीनें की अवधि में इसमें 13.29 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद FMCG इंडेक्स का नंबर है जिसमें 9.95 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ऑटो इंडेक्स 9.55 प्रतिशत नीचे आया है। इसी दौरान फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 8.41 प्रतिशत और निफ्टी IT इंडेक्स में 5.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

हालांकि, यह गिरावट अलग-अलग सेक्टर में अलग-अलग वजहों से आई है। रियल एस्टेट में,लोन की ज़्यादा लागत और घर खरीदने की क्षमता से जुड़ी चिंताएं घर खरीदारों की मांग पर असर डाल रही हैं। जबकि डेवलपर्स को प्रोजेक्ट की बढ़ती लागत और फाइनेंसिंग खर्चों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह,ऑटोमोबाइल कंपनियां ब्याज दरों,ग्राहकों की मांग और गाड़ी खरीदने की क्षमता पर पड़ने वाले निगेटिव असर से जूझ रहीं हैं।

FMCG कंपनियों के लिए वॉल्यूम में बढ़ोतरी, प्राइसिंग पावर और ग्राहकों की बदलती पसंद जैसी बातें अहम हैं। वहीं,IT कंपनियों को क्लाइंट के खर्च, टेक्नोलॉजी बजट और नई मांग के रेवेन्यू में बदलने की रफ़्तार जैसे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए, बाजार में गिरावट की वजह सिर्फ़ वैल्यूएशन नहीं,बल्कि मैक्रो-इकोनॉमिक दबाव,सेक्टर से जुड़ी चुनौतियां और अर्निंग को लेकर कमजोर पड़ती उम्मीदें हो सकती हैं।

वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज के रिसर्च डायरेक्टर क्रांति बाथिनी का कहना है कि पिछले तीन महीनों में रियल्टी, FMCG और इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे हैं। बढ़ती महंगाई और RBI के ब्याज दरों से जुड़े फैसलों ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला है।

निवेशकों के लिए कहां हो सकते हैं मौके?

ऐसे निवेशक जो मार्केट में करेक्शन के दौरान पैसा लगाना चाहते हैं,उन्हें ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनकी अर्निंग आउटलुक मजबूत है, बैलेंस शीट अच्छी स्थिति में है और जिनके वैल्यूएशन उनकी ग्रोथ की संभावनाओं को सही ढंग से दिखाते हों। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों पर खास तौर पर फोकस करना चाहिए। इन सेक्टर में अच्छी असेट क्वालिटी, पर्याप्त कैपिटल और आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता रखने वाली कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।

हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल कंपनियों पर भी फोकस किया जा सकता है। इनकी अर्निंग आउटलुक मजबूत प्रोडक्ट्स,लगातार बनी रहने वाली मांग और भरोसेमंद ग्रोथ पाइपलाइन पर टिकी होती है। हालांकि,निवेशकों को हर कंपनी का अलग-अलग आकलन करना चाहिए,न कि यह मान लेना चाहिए कि करेक्शन से पूरे सेक्टर को फायदा होगा।

क्रांति बाथिनी ने कहा कि मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से फार्मास्यूटिकल्स, डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर आकर्षक लग रहे हैं।

स्टॉकीफाई के फ़ाउंडर और CEO पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि अगर टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ता है तो IT सेक्टर में जिन कंपनियों के क्लाइंट के साथ अच्छे संबंध हैं,जिनका कैश फ़्लो मज़बूत है और जिनका वैल्यूएशन सही है वे निवेश के अच्छे मौके दे सकती हैं। रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेशकों को यह तय करने से पहले कि क्या शेयर की कीमतों में गिरावट से वैल्यू बनी है,बिक्री के ट्रेंड,इन्वेंट्री का लेवल,ऑर्डर बुक और कर्ज व फ़ाइनेंसिंग की लागत जैसी चीजो को देखना चाहिए।

मार्केट करेक्शन के दौरान गिरते हुए शेयर और आकर्षक वैल्यू वाले बिनेस के बीच का अंतर समझना बहुत ज़रूरी है। शेयर की कीमत मार्केट के अस्थायी सेंटीमेंट की वजह से गिर सकती है,लेकिन यह गिरावट धीमी ग्रोथ,कम मुनाफे या बिजनेस में किसी स्ट्रक्चरल बदलाव की वजह से भी हो सकती है। इन्वेस्टर्स को पैसा लगाने से पहले यह तय करना चाहिए कि इनमें से कौन-सी वजह गिरावट का कारण है।

HCL Tech shares Price: Q2 नतीजों के बाद शेयर बना रॉकेट, 5% से ज्यादा चढ़कर बना निफ्टी का टॉप गेनर, एक्सपर्ट्स से जानें अब खरीदें , बेचें या रहे बनें

क्या निवेशकों को लिस्टेड शेयरों से बाहर भी तलाशने चाहिए मौके?

बाजार में उतार-चढ़ाव निवेशकों को लिस्टेड इक्विटी के अलावा दूसरे मौकों को तलाशने के लिए प्रेरित कर सकता है। हालांकि,सिर्फ़ इसलिए कि व्यापक बाजार में गिरावट आ रही है,वैकल्पिक निवेश जरूरी नहीं कि ज्यादा सुरक्षित या आकर्षक हों।

पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि सुधारात्मक उपायों की वजह से निवेश के कई विकल्पों पर रिसर्च करते समय एनालिसिस का दायरा बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। खास तौर पर,प्राइवेट इक्विटी और प्री-आईपीओ फंडिंग जैसे इंस्ट्रूमेंट्स हैं जो कंपनियों के लिस्ट होने से पहले ही उनमें निवेश करने में मदद करते हैं।

प्राइवेट इक्विटी और प्री-IPO निवेश से कंपनियों के लिस्टेड मार्केट में आने से पहले ही उनमें निवेश का मौका मिल सकता है, लेकिन इनमें कुछ खास जोखिम भी होते हैं। इनमें वैल्यूएशन को लेकर अनिश्चितता,कम लिक्विडिटी,निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने की जरूरत और इस बात की संभावना शामिल है कि प्लान की गई लिस्टिंग में देरी हो सकती है। कभी-कभी तो लिस्टिंग ही नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में निवेशकों को सिर्फ़ लिस्टिंग से होने वाले फायदे की उम्मीद पर निर्भर रहने के बजाय, कंपनी के फाइनेंशियल परफ़ॉर्मेंस, मैनेजमेंट की क्वालिटी, स्केलेबिलिटी और उसके वैल्यूएशन के पीछे की वजहों की भी जांच करनी चाहिए।

ऐसे निवेश उन निवेशकों के लिए भी सही नहीं हो सकते जिन्हें अपने पैसे की तुरंत जरूरत होती है या जो लंबे समय तक निवेश बनाए रखने की स्थिति में नहीं हैं। इन विकल्पों पर विचार करने से पहले जोखिम, निवेश की अवधि और लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) की जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए।

मार्केट करेक्शन में क्या हो रणनीति?

मार्केट करेक्शन इन्वेस्टमेंट से जुड़े फैसलों पर दोबारा सोचने का मौका होता है,न कि गिरते हुए स्टॉक्स में जल्दबाजी में पैसा लगाने का अवसर। इन्वेस्टर्स को यह देखना चाहिए कि क्या उनके पोर्टफोलियो में कुछ खास सेक्टर पर बहुत ज़्यादा फोकस है,क्या इन्वेस्टमेंट के पीछे की उनकी मूल सोच अभी भी सही है, और क्या उनकी होल्डिंग्स उनके फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से सही हैं।

पीयूष झुनझुनवाला का कहना है कि निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका बिज़नेस मॉडल मज़बूत हो,जिनकी कमाई का अनुमान ठोस हो और जिनका वैल्यूएशन सही हो,क्योंकि इससे वे मुश्किल हालात में भी मज़बूत बनी रहती हैं। इसके अलावा,किश्तों में निवेश करने और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने की भी सलाह दी जाती है,क्योंकि इससे उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। इसके अलावा निवेश की अवधि का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।

रिटेल निवेशकों के लिए,अलग-अलग समय पर निवेश करने (staggered investing) से एक ही मार्केट लेवल पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम हो सकता है,हालांकि इससे मुनाफ़े की गारंटी नहीं मिलती और न ही नुकसान से बचा जा सकता है। अलग-अलग सेक्टर और एसेट क्लास में निवेश करने से पोर्टफोलियो के किसी एक हिस्से में भारी गिरावट के असर को भी कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।