Market Insight : मजबूत फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयरों में आ सकती है तेजी, बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड वाले शेयरों पर रहे नजर - वी के विजय कुमार

Market Insight :वी के विजय कुमार ने कहा कि बाजार में गिरावट की वजह बने मैक्रो-फ़ैक्टर अभी भी मौजूद हैं,इसलिए मुमकिन है कि निकट भविष्य में भी गिरावट जारी रहे। लेकिन यह ट्रेंड लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों के लिए मौके भी बना रहा है,जो बेहतर फंडामेंटल के बावजूद कमजोर बने हुए हैं

अपडेटेड Sep 08, 2026 पर 10:43 AM
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वी के विजय कुमार का कहना है कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय,निवेशक अपने पोर्टफोलियो में उन लार्ज-कैप शेयरों का वेटेज बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं जिनका रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर है

Market Insight : 8 सितंबर को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं। निफ्टी 23700 के नीचे कारोबार कर रहा है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स सपाट कारोबार कर रहे थे। सुबह 10:25 बजे के आसपास सेंसेक्स 323.97 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 75,808.84 पर और निफ्टी 85.25 अंक या 0.36 प्रतिशत गिरकर 23,693.90 पर कारोबार कर रहा था। लगभग 1695 शेयरों में बढ़त देखी गई, 1822 शेयरों में गिरावट आई और 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

ऐसे में बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चीफ वी के विजय कुमार का कहना है कि मार्केट में अब लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट का दौर चल रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,IT शेयरों में बिकवाली,इस महीने फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका और तेजी से बढ़ते IPO मार्केट (जो बहुत सारा पैसा खींच रहा है) ने मार्केट पर दबाव बनाया है।

चूंकि इस गिरावट की वजह बने मैक्रो-फ़ैक्टर अभी भी मौजूद हैं,इसलिए मुमकिन है कि निकट भविष्य में भी गिरावट जारी रहे। लेकिन यह ट्रेंड लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों के लिए मौके भी बना रहा है,जो बेहतर फंडामेंटल के बावजूद कमजोर बने हुए हैं।


आकर्षक वैल्यूएशन के बावजूद लार्ज-कैप शेयरों में कमजोरी की एक बड़ी वजह यह है कि हर महीने आने वाला अधिकांश SIP निवेश मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में जा रहा है,भले ही उनकी वैल्यूएशन महंगी है।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में मीन रिवर्जन (औसत स्तर पर वापसी) का समय आ गया है। इससे मज़बूत फंडामेंटल वाले लार्ज-कैप शेयरों में तेजी आ सकती है। इस बदलाव का सही समय बताना मुश्किल है। लेकिन ऐसा इस महीने के आखिर तक होने की संभावना है। उस समय तक NSE और Jio के बड़े IPO संपन्न हो जाएंगे और IPO का रिफंड निवेशकों को वापस मिल जाएगा।

मार्केट के उतार-चढ़ाव का सही समय पकड़ने की कोशिश करने के बजाय,निवेशक अपने पोर्टफोलियो में उन लार्ज-कैप शेयरों का वेटेज बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं जिनका रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर है।

चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और एनर्जी सप्लाई पर इसके असर पर नजरें बनाए हुए हैं। ब्रेंट क्रूड $95 के आसपास बना हुआ है,जिससे रिस्क लेने की भावना पर दबाव बना हुआ है और भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई और ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है।

 

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