Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ हुए बंद, जानिए 16 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Market Outlook : तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी अभी भी अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि,RSI निचले स्तरों से धीरे-धीरे सुधरा है और 40 के आसपास बना हुआ है,जबकि MACD बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत दे रहा है। बाजार के स्थिर होने के इन शुरुआती संकेतों के बावजूद,अगली दिशा तय करने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है
Market Outlook : आगे निफ्टी के लिए 22,500–22,480 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर इंडेक्स इस जोन के नीचे टूटता है,तो इसमें फिर से गिरावट आ सकती है
Market Outlook : 15 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए। जिसमें निफ्टी 23,000 के करीब सेटल हुआ है। बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 1,533.72 अंक या 2.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,315.61 पर और निफ्टी 374.65 अंक या 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। इस दौरान 1592 शेयरों में तेजी आई, 2606 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 162 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी में सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया, ट्रेंट, अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस और एलएंडटी शामिल रहे।
सेक्टर के लिहाज से देखें तो ऑटो, आईटी, इंफ्रा, ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक और रियल्टी सेक्टर में 1 से 1.8 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि मीडिया और पीएसयू बैंक सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई और स्मॉलकैप सूचकांक 1.3 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि भारतीय शेयर बाजारों में तेज उछाल देखने को मिला है। एआई के महंगे भाव और अमेरिका में बढ़ती महंगाई को लेकर बनी चिंताओं ने तकनीकी शेयरों वाले ग्लोबल बाजारों में बिकवाली बढ़ा। इससे भारत का बाजार तुलनात्मक रूप से अच्छा हो गया है। इसके चलते भारत की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों, प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियों और डिफेंसिव शेयरों की ओर रुझान बढ़ा।
बॉन्ड यील्ड में सुधार,रुपये की स्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार के सेंटिमेंट को और मज़बूत किया, जबकि इक्विटी टैक्सेशन पर पुनर्विचार की संभावना ने जोखिम लेने की इच्छा को बढ़ाया है। हालांकि, छोटे-मझोले शेयरों में कमजोरी और सरकारी बैंकों में बिकवाली से संकेत मिलता है कि इस उछाल में बड़ी भागीदारी की कमी है, जिससे यह पता चलता है कि बेंचमार्क गेन बाजार की आंतरिक मजबूती को सही तरीके से पेश नहीं कर रहे हैं।
ऐसे में निकट भविष्य में बाजार की स्थिरता दूसरी तिमाही के नतीजों और मार्जिन में सुधाप, ब्रॉडर मार्केट की भागीदारी और विदेशी निवेश की वापसी पर निर्भर करेगी। बाजार की नजर भू-राजनीतिक स्थितियों और ग्लोबल महंगाई की दिशा पर रहेगा। कच्चे तेल और रुपए की चाल की भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका होगी।
LKP सिक्योरिटीज में टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी ने अपने हालिया निचले स्तरों से एक मजबूत वापसी की है और डेली चार्ट पर 20 DMA को फिर से हासिल कर लिया है। वहीं, RSI में पॉजिटिव डाइवर्जेंस के साथ एक बुलिश क्रॉसओवर देखने को मिल रहा है,जो मोमेंटम में सुधार का संकेत है। इंडेक्स 23,000 के आसपास ट्रेड कर रहा है। अगर इस स्तर के ऊपर मोमेंटम बना रहता है,तो यह 23,180 के पास 38.2% फिबोनाची रिट्रेसमेंट (Fibonacci retracement) के स्तर को टेस्ट कर सकता है।
हालांकि, बड़ा ट्रेंड अभी भी कमजोर है क्योंकि निफ्टी अपने 50 DMA और 200 DMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। इसलिए,सावधानी बरतने की सलाह है। जब तक इंडेक्स अपने 50 DMA को वापस हासिल नहीं कर लेता, तब तक मौजूदा तेजी को केवल एक रिलीफ रैली के रूप में ही देखना चाहिए। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,800 पर है,जबकि रेजिस्टेंस 23,200 पर है।
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी पिछले 11 ट्रेडिंग सेशन से कंसोलिडेट हो रहा है जिसमें दोनों तरफ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। डेली टाइमफ्रेम पर,इंडेक्स ने ऊपर और नीचे विक (wicks) वाली एक 'बेयरिश' कैंडल बनाई है। यह लगातार उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में अनिश्चितता और किसी स्पष्ट दिशा की कमी को दर्शाता है।
तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी अभी भी अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि,RSI निचले स्तरों से धीरे-धीरे सुधरा है और 40 के आसपास बना हुआ है,जबकि MACD बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत दे रहा है। बाजार के स्थिर होने के इन शुरुआती संकेतों के बावजूद,अगली दिशा तय करने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।
आगे निफ्टी के लिए 22,500–22,480 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर इंडेक्स इस जोन के नीचे टूटता है,तो इसमें फिर से गिरावट आ सकती है और यह 22,330 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,22,770–22,800 का स्तर एक तत्काल रेजिस्टेंस बन सकता है। अगर इंडेक्स इस जोन के ऊपर टिक जाता है तो यह पुलबैक रैली 22,950 तक बढ़ सकती है। जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट नहीं आता,तब तक इंडेक्स के एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है और कुल मिलाकर बाजार का ढांचा अभी भी सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।
इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज ने कहा कि दिग्गज IT कंपनियों के शानदार Q2 नतीजों के बाद IT शेयरों में आई तेजी से बाजारों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली। बैंकिंग और ऑटोमोबाइल शेयरों में बढ़त और साथ ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने ऑयल एंड गैस सेक्टर के सेंटीमेंट को भी मजबूत किया। RBI के कदमों की मदद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार सुधार हुआ,जिससे घरेलू इक्विटी बाजारों को और सहारा मिला। इस बीच AI से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली के चलते अन्य एशियाई बाजारों में 1-8% तक की गिरावट दर्ज की गई। जिसका फायदा भारत को मिला।
हालांकि,बाजार का मौजूदा सेंटीमेंट अभी भी सतर्क या मंदी की ओर झुका हुआ है। अमेरिका-ईरान विवाद के कारण पश्चिम एशिया में अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा घरेलू बाजार में लगातार हो रही बिकवाली के चलते निवेशकों की चिंताएं बनी रह सकती हैं।
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