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Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ हुए बंद, जानिए 16 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी अभी भी अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि,RSI निचले स्तरों से धीरे-धीरे सुधरा है और 40 के आसपास बना हुआ है,जबकि MACD बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत दे रहा है। बाजार के स्थिर होने के इन शुरुआती संकेतों के बावजूद,अगली दिशा तय करने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है

Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Oct 15, 2026 पर 4:31 PM
Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ हुए बंद, जानिए 16 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Market Outlook : आगे निफ्टी के लिए 22,500–22,480 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। अगर इंडेक्स इस जोन के नीचे टूटता है,तो इसमें फिर से गिरावट आ सकती है

Market Outlook : 15 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए। जिसमें निफ्टी 23,000 के करीब सेटल हुआ है। बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 1,533.72 अंक या 2.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,315.61 पर और निफ्टी 374.65 अंक या 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। इस दौरान 1592 शेयरों में तेजी आई, 2606 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 162 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया, ट्रेंट, अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस और एलएंडटी शामिल रहे।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो ऑटो, आईटी, इंफ्रा, ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक और रियल्टी सेक्टर में 1 से 1.8 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि मीडिया और पीएसयू बैंक सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई और स्मॉलकैप सूचकांक 1.3 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि भारतीय शेयर बाजारों में तेज उछाल देखने को मिला है। एआई के महंगे भाव और अमेरिका में बढ़ती महंगाई को लेकर बनी चिंताओं ने तकनीकी शेयरों वाले ग्लोबल बाजारों में बिकवाली बढ़ा। इससे भारत का बाजार तुलनात्मक रूप से अच्छा हो गया है। इसके चलते भारत की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों, प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियों और डिफेंसिव शेयरों की ओर रुझान बढ़ा।

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