Market Outlook : बाजार की तेजी को लगा ब्रेक, जानिए 21 अक्टूबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल
Market Outlook :बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आज भारतीय बाजार में गिरावट देखने को मिली, जिससे पिछले दो दिनों की तेजी का सिलसिला टूट गया। निजी बैंकों में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ
Market Outlook : इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज का कहना है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है
Market Outlook : 19 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्सों की लगातार दो दिनों की तेजी थम गई और बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 22,900 के स्तर से नीचे आ गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,852.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक या 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 पर बंद हुए। आज लगभग 1163 शेयरों में तेजी आई, 2925 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 181 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दिखाने वाले शेयरों में एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट और इंफोसिस शामिल रहे। वहीं, तेजी दिखाने वाले शेयरों में जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, एसबीआई, एलएंडटी और ओएनजीसी शामिल रहे।
पीएसयू बैंक (2.2% की तेजी) को छोड़कर, अन्य सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। एफएमसीजी सूचकांक में 1.2%, आईटी सूचकांक में 1.3% और प्राइवेट बैंक सूचकांक में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी 1-1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आज भारतीय बाजार में गिरावट देखने को मिली, जिससे पिछले दो दिनों की तेजी का सिलसिला टूट गया। निजी बैंकों में भारी बिकवाली और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ। सेंसेक्स पिछले सेशन के मुकाबले 876 अंक गिरकर लगभग 73,853 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257 अंक गिरकर 22,889 पर बंद हुआ।
बाजार में आई इस गिरावट में निजी बैंकों के शेयरों का सबसे बड़ा योगदान रहा। सेंसेक्स में आई कुल गिरावट में से आधे से ज्यादा हिस्सा HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक का था। एक्सिस बैंक के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 39.4% की बढ़ोतरी के बावजूद, इसके शेयर में करीब 5% की गिरावट आई। इसी तरह, HDFC बैंक के नेट प्रॉफिट में 4.7% की बढ़ोतरी होने के बावजूद, इसके शेयर में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर PSU बैंकों का प्रदर्शन बेहतर रहा। यूनियन बैंक के शेयरों में करीब 5% की तेजी आई, जिसे Q2 मुनाफे में सालाना आधार पर 30% की बढ़ोतरी का सपोर्ट मिला। वहीं, करूर वैश्य बैंक के शेयर अपने अब तक के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गए।
आगे बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों (FPI) का रुख, भू-राजनीतिक घटनाएं और कंपनियों के आने वाले Q2 नतीजे बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करने वाले मेन फैक्टर होंगे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि भारतीय इक्विटी बाजारों में फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। जिससे हालिया रिकवरी पर पानी फिर गया। कमजोर ग्लोबल संकेतों और प्राइवेट बैंकों तथा IT शेयरों में बिकवाली के कारण निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ।
कॉर्पोरेट नतीजों से भरे एक व्यस्त सप्ताह से पहले ग्लोबल बाजारों में सतर्कता का माहौल रहा। तिमाही नतीजों और मार्जिन ट्रेंड को लेकर बनी चिंताओं के चलते प्राइवेट बैंक दबाव में रहे, जबकि PSU बैंकों ने बाजार की कमजोरी के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया। इसकी वजह मार्जिन और एसेट क्वालिटी के उम्मीद से बेहतर रहने की संभावना है।
रूस से जुड़े प्रतिबंधों में अमेरिका द्वारा ढ़ील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। इससे ग्लोबल मार्केट में रूसी तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद जगी है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों का असर बना रहने के कारण कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं, छोटे-मझोले शेयरों का रुझान भी कमजोर रहा, जो नतीजों से जुड़ी वोलैटिलिटी और अनिश्चित ग्लोबल संकेतों के बीच निवेशकों में बनी सतर्कता की भावना को दिखाता है।
LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट, वत्सल भुवा का कहना है किनिफ्टी ने एक लॉन्ग बेयरिश कैंडलस्टिक बनाई है। 3 अगस्त के हाई से 8 अक्टूबर के लो तक के 38.2% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल (23,186) के पास बिकवाली का दबाव देखने को मिला है।
इंडेक्स ने 23,000 के अहम सपोर्ट लेवल को भी तोड़ दिया है, जो लगातार बनी कमजोरी का संकेत है। इसका तत्काल सपोर्ट 22,800–22,820 के स्तर पर है, जो इसके डेली 20-SMA के करीब है।
अगर इंडेक्स 22,650–22,700 के स्तर से नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। इंडेक्स ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए। उनके लिए 22,800 एक अहम सपोर्ट है, जबकि 23,000–23,186 रेजिस्टेंस का काम करेगा। 'मीन-रिवर्जन' रैली के दौरान बनाई गई लॉन्ग पोजीशन पर नजर रखनी चाहिए। अगर इंडेक्स 22,600 के स्तर से नीचे चला जाता है तो तेज गिरावट आ सकती है।
इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज का कहना है कि पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये में मजबूती के कारण बाजार में मजबूती देखने को मिली, लेकिन कमजोर ग्लेबल संकेतों और घरेलू इक्विटी से FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की लगातार निकासी के चलते बाजार में फिर से बिकवाली लौट आई।
आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर कायम अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों (सेफ-हेवन एसेट्स) की ओर ले जाएगी, जिससे वे अपनी इक्विटी होल्डिंग्स बेचने दिख सकते हैं।
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