Market Outlook : हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 28 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : आगे चलकर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के नतीजों, कच्चे तेल के रुझान, पश्चिम एशिया संकट से जुड़ घटनाओं और अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसलों की अहम भूमिका होगी

अपडेटेड Oct 27, 2026 पर 4:31 PM
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Market Outlook : बेंचमार्क इंडेक्सों में कुछ मजबूती दिखने के बावजूद फॉलोअप बाइंग में कमजोरी से संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी कमजोर है

Market Outlook : 27 अक्टूबर को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र में भारतीय इक्विटी इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 8.08 अंक या 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर और निफ्टी 3.45 अंक या 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,749.75 पर बंद हुआ। लगभग 2807 शेयरों में तेजी आई,1334 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, भारती एयरटेल, ट्रेंट, बीएसई लिमिटेड और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन शामिल रहे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एसबीआई, कोल इंडिया, टीसीएस और एशियन पेंट्स शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो, मीडिया इंडेक्स में 3.6% की तेजी आई, रियल्टी और फार्मा इंडेक्स में 2-2% की बढ़त हुई और ऑटो इंडेक्स 1.4% ऊपर रहा। वहीं, आईटी, ऑयल एंड गैस और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.5-0.5% की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.8 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत की तेजी आई।


आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बीच भारतीय शेयर बाजार सपाट बंद हुए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेड के फैसलों से पहले बरती गई सावधानी के चलते ग्लोबल मार्केट के सकारात्मक संकेतों का असर फीका पड़ गया।

प्रॉफिट बुकिंग के कारण IT और प्राइवेट बैंकों के शेयरों में गिरावट आई। जबकि फार्मा, ऑटो, PSU बैंकों और रियल्टी शेयरों में तेजी रही। ब्रॉडर मार्केट में अच्छी भागीदारी यह दिखाती है कि घरेलू स्तर पर निवेशक अभी भी चुनिंदा शेयरों में जोखिम लेने को तैयार हैं।

दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजों और घरेलू निवेशकों के मजबूत निवेश ने विदेशी निवेशकों की लगातार हो रही बिकवाली के असर को काफी हद तक बेअसर कर दिया है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर के पार जाने और रुपये की कमजोरी से महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव जैसे जोखिम पैदा हो रहे हैं

आगे चलकर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के नतीजों, कच्चे तेल के रुझान, पश्चिम एशिया संकट से जुड़ घटनाओं और अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसलों की अहम भूमिका होगी।

एलकेपी सिक्योरिटीज में तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी इंडेक्स कुछ समय के लिए अपने 20 DMA और 200 WMA जैसे अहम तकनीकी स्तरों के नीचे फिसलने के बाद डेली चार्ट पर इनके ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। इससे पता चलता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी का सपोर्ट मौजूद है। हालांकि,22800 के रेजिस्टेंस जोन के पास बिकवाली का दबाव दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर,मौजूदा स्थिति शॉर्ट टर्म में साइडवेज से लेकर थोड़ी पॉजिटिव रहने का संकेत दे रही है।

नीचे की तरफ, निफ्टी के लिए 22,600 पर तात्कालिक सपोर्ट बना हुआ है,जबकि 22,800 पर पहला रेजिस्टेंस है। अगर बाजार 22,800 के स्तर के ऊपर टिका रहता है तो यह 23,000 के स्तर तक पहुंचने का रास्ता खोल सकता है। इसलिए,ट्रेडर्स को लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रणनीति अपनानी चाहिए।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि भारतीय इक्विटी बाजार के कंसोलिडेशन के दौर में बने रहने की उम्मीद है। निवेशकों की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग, फेडरल रिजर्व के फैसले और बुधवार को आने वाली उसकी टिप्पणी पर रहेगी। भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO, जियो प्लेटफॉर्म्स कुल 22.19 गुना भरा है। इसमें QIBs का हिस्सा 70.55 गुना भरा है। जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 2.72 गुना भरा है। कल निवेशकों की नजर हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, अडानी एंटरप्राइजेज, TVS मोटर, हुंडई मोटर इंडिया, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, वेदांता, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस, हीरो मोटोकॉर्प और JSW एनर्जी जैसी कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजों पर रहेगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और यह लगभग बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। बाजार में किसी स्पष्ट दिशा का न होना यह दिखाता है कि हालिया करेक्शन के बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है। ब्रॉडर मार्केट के शेयरों का बेहतर प्रदर्शन यह बताता है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं, हालांकि बाजार में एक मजबूत और टिकाऊ रिकवरी के लिए लगातार भागीदारी जरूरी होगी।

बेंचमार्क इंडेक्सों में कुछ मजबूती दिखने के बावजूद फॉलोअप बाइंग में कमजोरी से संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी कमजोर है। आगे अगर निफ्टी 20-DEMA (जो अभी लगभग 22,825 के आसपास है) के ऊपर निकलता है तो 23,100-23,300 के स्तर तक रिकवरी की संभावना बढ़ जाएगी। हालांकि,अगर निफ्टी इस दीवार को पार नहीं कर पाता है तो हालिया रिकवरी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। ट्रेडर्स को चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना चाहिए,बहुत ज्यादा लीवरेज (उधार लेकर ट्रेडिंग) लेने से बचना चाहिए और रिस्क मैनेजमेंट का सख्ती से पालन करना चाहिए।

वहीं, निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जो फंडामेंटली मजबूत हों, जिनकी अर्निंग स्थिर हो और जिनका वैल्यूएशन सही हो। जब तक बाजार में एक टिकाऊ रिकवरी नहीं आ जाती, तब तक एक साथ बड़ी खरीदारी करने के बजाय टुकड़ों में (staggered accumulation) निवेश करना बेहतर होगा।

 

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