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Market Trend : शुरुआती नुकसान की भरपाई के बाद तेजी में सेंसेक्स-निफ्टी, शॉर्ट टर्म में मोटी कमाई के लिए इन शेयरों पर रहे नजर

Market Trend : एक्सपर्ट्स की राय है कि निवेशकों के लिए यह निकट अवधि की अनिश्चितताओं से परे देखने और फंडामेंटल्स पर फोकस करने का एक अवसर है। बाजार में पिछले दो सालों के कमजोर प्रदर्शन के बाद अब वैल्यूएशन काफी अच्छे स्तर पर आ गए हैं, जबकि कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ती रही है। ऐसे में रिस्क-रिवॉर्ड का अनुपात अब और भी बेहतर हो गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 06, 2026 पर 10:52 AM
Market Trend : शुरुआती नुकसान की भरपाई के बाद तेजी में सेंसेक्स-निफ्टी, शॉर्ट टर्म में मोटी कमाई के लिए इन शेयरों पर रहे नजर
Market Trend : बाजार में चल रही इस तेजी को शानदार अर्निंग ग्रोथ का मज़बूत आधार मिला है। अर्निंग ग्रोथ उम्मीद से कहीं बेहतर रही है

Market Trend : भारतीय बेंचमार्क इंडेक्सों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली है और अब ये बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स 569.46 अंक या 0.72 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,879.47 पर है,जबकि निफ्टी 109.30 अंक या 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,645.90 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई है। सेक्टर्स की बात करें तो IT इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी है, जबकि एनर्जी, मेटल और रियल्टी सेक्टर्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है।

मुश्किल ग्लोबल आर्थिक हालात के बावजूद भारत के मैक्रो आंकड़े काफी मजबूत

TCG AMC के MD और CEO शहज़ाद मैडन का कहना है कि एनर्जी की ऊंची कीमतें, AI से जुड़ा रुझान, करोंसी में कमजोरी और हाल तक हुई FII की निकासी, ये सभी भारतीय बाजार पर बड़ा दबाव बनाए हुए थे। अब यह दबाव कम हो रहा है और मैक्रो नजरिए से देखा जाए तो सबसे बुरा दौर शायद पीछे छूट चुका है। फाइनली बाजार का प्रदर्शन फंडामेंटल्स और अर्निंग्स से तय होगा। मुश्किल ग्लोबल आर्थिक हालात के बावजूद भारत के मैक्रो आंकड़े काफी मजबूत बने रहे हैं और पिछले तीन तिमाहियों में भारतीय कॉरपोरेट जगत के नतीजे भी शानदार रहे हैं। इससे भविष्य में मजबूत ग्रोथ की नींव तैयार होनी चाहिए।

निवेशकों के लिए यह निकट अवधि की अनिश्चितताओं से परे देखने और फंडामेंटल्स पर फोकस करने का एक अवसर है। बाजार में पिछले दो सालों के कमजोर प्रदर्शन के बाद अब वैल्यूएशन काफी अच्छे स्तर पर आ गए हैं, जबकि कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ती रही है। ऐसे में रिस्क-रिवॉर्ड का अनुपात अब और भी बेहतर हो गया है।

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