क्लीन एनर्जी पर मारुति का बड़ा दांव! 4 नए बायोगैस प्लांट पर ₹561 करोड़ खर्च करेगी कंपनी, जानिए RC भार्गव का मास्टरप्लान

Maruti Suzuki Biogas Plant: कंपनी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने शेयरधारकों को जानकारी दी है कि मारुति सुजुकी चार बायोगैस प्लांट लगाने के लिए ₹561 करोड़ का निवेश करेगी। बायोगैस स्थानीय संसाधनों से बड़ी मात्रा में तैयार की जा सकती है। यह आयातित सीएनजी का विकल्प बनेगी, जो शून्य आयात सामग्री के साथ पूरी तरह से स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है

अपडेटेड Aug 09, 2026 पर 3:33 PM
पहले चरण के तहत खरखौदा संयंत्र में 10 टन प्रति दिन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा

Maruti Suzuki Biogas Plant Investment: देश की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी पर बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने शेयरधारकों को जानकारी दी है कि मारुति सुजुकी चार बायोगैस प्लांट लगाने के लिए ₹561 करोड़ का निवेश करेगी।

आरसी भार्गव ने मारुति सुजुकी की FY26 वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि बोर्ड ने पहले चरण में ₹561 करोड़ की लागत से 4 बायोगैस प्लांट शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद प्रक्रिया और तकनीक की गहरी समझ बनने के बाद कंपनी बायोगैस के उत्पादन और वितरण में और भी भारी-भरकम राशि का निवेश करेगी।

खरखौदा और मानेसर प्लांट में तेजी से बढ़ रहा काम


मारुति सुजुकी ने अपनी उत्पादन इकाइयों को हरित ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। पहले चरण के तहत खरखौदा संयंत्र में 10 टन प्रति दिन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह प्लांट FY27 में चालू होने की उम्मीद है और अपनी पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद यह प्लांट की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20% हिस्सा पूरा करेगा।

कंपनी ने अपने मानेसर प्लांट की बायोगैस क्षमता को 0.2 TPD से बढ़ाकर 0.7 TPD कर दिया है। इससे सालाना लगभग 3.6 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर बायोगैस का उत्पादन होने की उम्मीद है। मानेसर में फूड वेस्ट, नेपियर घास और धान के पुआल का उपयोग किया जाता है, साथ ही गोबर के इस्तेमाल का भी प्रावधान है।

गुजरात के हंसलपुर प्लांट में प्राकृतिक गैस की जगह बायोगैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है, जिससे लगभग 10% ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं। कंपनी का लक्ष्य FY31 तक रोजाना 20 टन से अधिक बायोगैस का उपयोग करने का है।

सीएनजी का विकल्प और किसानों की आय में इजाफे का विजन

आरसी भार्गव ने बायोगैस के व्यापक फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए मल्टीपल टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल करना होगा। बायोगैस स्थानीय संसाधनों से बड़ी मात्रा में तैयार की जा सकती है। यह आयातित सीएनजी का विकल्प बनेगी, जो शून्य आयात सामग्री के साथ पूरी तरह से स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है।

फसल के अवशेषों का उपयोग बायोगैस में होने से पराली जलाने की समस्या से राहत मिलेगी, जिससे पर्यावरण साफ रहेगा और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। बायोगैस उत्पादन के दौरान मिलने वाला उप-उत्पाद खेतों की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ाएगा।

कृषि अवशेष और गोबर की बिक्री से किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि के यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए कंपनी पिछले दो वर्षों से पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के साथ काम कर रही है।

सरकार की GOBARdhan योजना से मिलेगा बूस्ट

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त को ₹23,731 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ GOBARdhan योजना को मंजूरी दी है। यह योजना FY27 से FY36 तक लागू की जाएगी, जिसका उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से घरेलू बायोगैस उत्पादन में लगभग 10 गुना बढ़ोतरी होगी और इस सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। मारुति सुजुकी का यह निवेश इस दिशा में एक बड़ा कॉर्पोरेट कदम माना जा रहा है।

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