Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 की डिटेलिंग आज जारी हो सकती है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव इस स्कीम की पूरी जानकारी 4 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में देंगे। सरकार देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में अत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए सरकार ने मोबाइल की पीएलए स्कीम भी चलाई थी। लेकिन यह स्कीम मार्च 2026 में खत्म हो गई थी। उसके बाद कैबिनेट ने एक नई स्कीम को मंजूरी दी। जुलाई में इस स्कीम को मंजूरी मिली थी। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 को मंजूरी पहले से ही मिल चुकी है। लेकिन अभी उसकी गाइडलाइंस आना बाकी हैं। इसकी गाइडलाइंस भी सरकार बहुत जल्दी ही जारी कर सकती है। आज शाम ही इसकी डिटेलिंग आ सकती है।
इस स्कीम की बात करें तो इसके तहत सरकार कंपनियों के 2.5% से लेकर के 5% तक के इंसेंटिव देती है। इसके साथ अगर ये कंपनियां भारत में ही आरएडी करती हैं या लोकल सोर्सेस कंपोनेंट्स की सोर्सेसिंग करती है तो उनको 3% एडिशनल इंसेंटिव्स मिल सकते हैं। लेकिन अगर कोई कंपनी भारत के अंदर पूरी तरह से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग करना चाहती है तो इंसेंटिव्स बढ़कर 8 से लेकर के 10% तक हो सकते हैं। सरकार बहुत जल्दी इसकी गाइडलाइंस जारी करेगी। इसके लिए कंपनियों से उनसे आवेदन मंगाने की शुरुआत होगी। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव आज इस बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे और जानकारी देंगे कि स्कीम अब कहां तक पहुंच गई है।
जुलाई में कैबिनेट ने 62500 करोड़ रुपए की यह स्कीम मंजूर की थी। यह स्कीम वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 यानी अगले 5 साल के लिए होगी। इसमें बिक्री से लेकर R&D तक मोटा इंसेंटिव मिलेगा। इसके लिए जल्द ही गाइडलाइन्स जारी होंगी। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 का मकसद मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग बढ़ाना है। भारत अब मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता है। सरकार का लक्ष्य है कि देश में बनने वाले मोबाइल फोन में घरेलू वैल्यू एडिशन को मौजूदा 22 से 23% से बढ़ाकर 35 से 40% तक किया जाए। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए अब कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में सरकार घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
बताते चलें कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन साल 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस पूरे सेक्टर से करीब 25 लाख नौकरियां जुड़ी हुई हैं। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग इस ग्रोथ का सबसे बड़ा हिस्सा रहा है। देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 में 18,900 करोड़ रुपये था जो 2025-26 में बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं मोबाइल फोन एक्सपोर्ट 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।