Investment Mantra : बाजार में हाल की गिरावट में सबसे ज्यादा पिटाई स्मॉलकैप शेयरों की हुई है। 1 महीने में स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 6.5% नीचे आया है। उतार-चढ़ाव के बीच क्या स्मॉलकैप में निवेश का मौका बन रहा है? हालिया गिरावट के बाद क्या वैल्युएशन आकर्षक हुए हैं,या अभी भी सावधानी जरूरी है? साथ ही, इस बाजार में SIP जारी रखना सही है या एकमुश्त निवेश धीरे-धीरे करना चाहिए? इन सभी मुश्किल सवालों का हल देने के लिए हमारे साथ हैं DSP Mutual Fund के इक्विटी हेड विनीत सांब्रे।
बाजार पर बात करते हुए विनीत सांब्रे ने कहा कि मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति अनिश्चितता भरी है। देश के मैक्रो हालात मुश्किल भरे हैं। लेकिन युद्ध का असर कंपनियों के नतीजों में नहीं दिख रहा। क्रूड और ब्याज दरें ऊंची रहीं तो इकोनॉमी पर दबाव संभव है। कोरोना के बाद कंपनियों ने अपनी बैलेंसशीट मजबूत की है। कंपनियों ने कर्ज घटाया है और वर्किंग कैपिटल में सुधार किया है। रिफॉर्म के चलते कंपनियों में ग्रोथ दिख रही है। इक्विटी में ज्यादा दिक्कत नहीं, ग्रोथ वाली कंपनियों में रिटर्न मिलेगा। थोड़े समय के लिए बाजार खराब भी रहे तो धैर्य न छोड़ें।
लंबी अवधि के निवेशक स्मॉलकैप में निवेश करें
स्मॉलकैप में उतार-चढ़ाव ज्यादा है। लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। कई स्मॉलकैप कंपनियां अपने सेक्टर की लीडर हैं। 2-3 तिमाहियों से स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे मिडकैप से बेहतर रहे हैं। स्मॉलकैप के वैल्युएशन अच्छे हैं, लेकिन सस्ते नहीं है। लंबी अवधि के निवेशक स्मॉलकैप में निवेश करें।
कम उम्र वाले निवेशक 50-60% तक स्मॉलकैप में निवेश करें
कम उम्र वाले निवेशक 50-60% तक स्मॉलकैप में निवेश कर सकते हैं। 5-6 साल का नजरिया रखने वाले निवेशक मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश करें।
दूसरे मार्केट दिग्गजों का भी कहना है कि गिरते बाजार में स्मॉलकैप शेयरों या फंड्स में निवेश करना एक अच्छा मौका और बड़ा जोखिम दोनों हो सकता है। ताजे आंकड़ों के मुताबिक स्मॉलकैप सेगमेंट में भारी उतार-चढ़ाव और करेक्शन देखने को मिला है। इसके बावजूद इनमें निवेशकों का रुझान बना हुआ है।
हालिया करेक्शन के चलते कई अच्छी क्वालिटी वाली छोटी कंपनियों के शेयर अब सस्ते और आकर्षक भाव पर मिल रहे हैं। AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, गिरते बाजार और करेक्शन के बावजूद सितंबर 2026 में स्मॉल-कैप फंड्स में रिकॉर्ड 9,038.57 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया है, जो इनमें लॉन्ग टर्म निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर आपका नजरिया कम से कम 5 से 7 साल या उससे अधिक का है तो गिरावट के दौरान SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए यूनिट्स सस्ते में जमा करने का यह सही समय हो सकता है।
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