सिगरेट और पान मसाला पर लगेगा नया सेस? दो नए बिल लाने की तैयारी में सरकार

सरकार सिगरेट और पान मसाला पर लगे GST कंपनसेशन सेस को बदलने के लिए दो नए बिल लाने वाली है। जानिए GST कंपनसेशन सेस क्यों लगा था और अब क्या बदलने वाला है।

अपडेटेड Nov 30, 2025 पर 10:30 PM
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सूत्रों के मुताबिक, बिल पेश होने के बाद भी तंबाकू पर लगने वाली सेस दरें वही रहेंगी।

सरकार अगले हफ्ते लोकसभा में दो महत्वपूर्ण बिल पेश करने जा रही है, जो सिगरेट और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले GST कंपनसेशन सेस की जगह ले सकते हैं। फिलहाल तंबाकू और पान मसाला पर 28% GST के साथ अतिरिक्त कंपनसेशन सेस लगाया जाता है। इसकी मौजूदा व्यवस्था अब खत्म होने वाली है। दोनों नए बिल इन्हीं की जगह ले सकते हैं।

कौन-कौन से बिल पेश होंगे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को Central Excise Amendment Bill, 2025 और Health Security se National Security Cess Bill, 2025 लोकसभा में पेश करेंगी।

सूत्रों का कहना है कि Central Excise Amendment Bill मौजूदा GST मुआवजा सेस को बदलने के लिए लाया जा रहा है।


सेस दरों में कोई बदलाव नहीं

सूत्रों के मुताबिक, बिल पेश होने के बाद भी तंबाकू पर लगने वाली सेस दरें वही रहेंगी, यानी GST के तहत जो सेस अभी लगाया जा रहा है, वही आगे भी जारी रहेगा। दरों में कोई कटौती या बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

कंपनसेशन सेस क्यों खत्म हो रहा है

कंपनसेशन सेस को पहले चार साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक किया गया था। यह बढ़ोतरी इसलिए की गई थी ताकि COVID अवधि में राज्यों को मुआवजा देने के लिए लिए गए कर्ज की भरपाई की जा सके।

यह सेस व्यवस्था असल में सिर्फ पांच साल के लिए थी और 30 जून 2022 को खत्म होनी थी। इसे राज्यों के GST रोलआउट से जुड़े रेवेन्यू नुकसान की भरपाई के लिए लागू किया गया था। अब उम्मीद है कि राज्यों के लिए लिया गया यह कर्ज दिसंबर तक पूरी तरह चुका दिया जाएगा, जिसके बाद सेस की मौजूदा व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

GST काउंसिल का पिछला फैसला

3 सितंबर 2025 को हुई GST काउंसिल की बैठक में यह तय हुआ था कि तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर मुआवजा सेस तब तक जारी रहेगा, जब तक लिए गए कर्ज की पूरी अदायगी नहीं हो जाती।

कंपनसेशन सेस का मतलब

कंपनसेशन सेस वह अतिरिक्त टैक्स है जो सरकार कुछ चुनिंदा उत्पादों पर GST के अलावा लगाती है। जैसे तंबाकू, पान मसाला, कोयला, बड़ी कारें आदि।

इसका मकसद था कि GST लागू होने के बाद जिन राज्यों का रेवेन्यू कम हो गया, उनकी भरपाई की जा सके। यह पैसा सीधे राज्यों को नुकसान की भरपाई के रूप में दिया जाता था।

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